मूल के कृषि महाविद्यालय द्वारा कृषक वैज्ञानिक मंच की 26 वी बैठक संपन्न

मूल  ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )

कृषि महाविद्यालय, मूल द्वारा 11 फरवरी, 2025 को ग्राम टेकाडी में छब्बीसवीं किसान वैज्ञानिक फोरम बैठक का आयोजन किया। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ. विष्णुकांत टेकाले, ग्राम के उपसरपंच श्री शंकर सिडाम, प्रगतिशील किसान श्री मनोज चौधरी, सुनील गेडाम, अन्य किसान एवं कृषि महाविद्यालय, मुल के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। सबसे पहले कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. टेकाले ने उप सरपंच को कृषि महाविद्यालय द्वारा उत्पादित खाद उपहार स्वरूप दिया। बैठक में मुख्य रूप से “रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों का प्रबंधन” विषय पर चर्चा की गई। इसमें कॉलेज के सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ. विष्णुकांत टेकाले ने कहा कि, किसानों को केवल धान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खेती के साथ-साथ तिलहन, दलहन, अनाज, फूल और विभिन्न सब्जी फसलों की खेती भी करनी चाहिए। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि संवादिनी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी । किसानों को जानकारी के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत कार्यालय में विश्वविद्यालय की तकनीक के साथ कृषि संवादिनी रखने का अनुरोध किया।


कृषि विद्या विशेषज्ञ प्रा. मोहिनी पुनसे ने कार्बनिक पदार्थ की कमी के कारण दिन-ब-दिन खराब हो रही मिट्टी की बनावट के बारे में जानकारी दी। जैविक कार्बन के महत्व को प्रदर्शित किया। किसानों को तिल और मूंगफली तिलहन की खेती की तकनीक के साथ-साथ कृमिनाशक, बायोसाइड और दशपर्णी अर्क बनाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी । बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. अश्विनी गायधनी ने किसानों को सब्जी की फसल में गीली घास के महत्व के बारे में समझाया। कहा कि, सब्जी की फसल में सही समय पर बुआई जरूरी है। गेंदा की फसल को सापला फसल के रूप में लगाने का सुझाव दिया। कृषि विज्ञान विशेषज्ञ प्रा.देवानंद कुसुम्बे ने ग्रीष्मकालीन धान एवं चना फसल की निराई-गुड़ाई, उर्वरक एवं जल प्रबंधन की जानकारी दी तथा निबोली अर्क तैयार करने के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया।


वनस्पति रोग शास्त्र विषयतज्ञ डाॅ. गीतांशु डिंकवार, ने पादप रोगविज्ञानी, रासायनिक उर्वरकों, कवकनाशी, कीटनाशकों, जैविक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करने के बजाय ट्राइकोडर्मा, बिवेरिया, मेटारिज़ियम आदि का उपयोग करने की सलाह दी। अनाज, दालों और सब्जियों की बुआई से पहले जैविक कवकनाशी ट्राइकोडर्मा से उपचार किया जाए, ऐसा बताया। उन्होंने धान एवं सब्जी फसलों में लगने वाले रोगों एवं कीटों के एकीकृत प्रबंधन की भी जानकारी दी।   इस अवसर पर किसानों ने विश्वविद्यालय एवं कृषि महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषिसंवादिनी-2025, और कृषि महाविद्यालय द्वारा उत्पादित खाद एवं वर्मीवाश की खरीदारी की।

इस कार्यक्रम में कुल 36 किसान और 6 वैज्ञानिक शामिल हुए। उक्त कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन प्रा. मनीषा लवनकर ने किया।