Category: मृदा परीक्षण
written by Chandrakant Maniyar | June 16, 2025

मूल ( प्रा.चंद्रकांत मनियार )
डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला, संलग्नित मूल के कृषि महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने ग्रामीण जागरूकता कार्य अनुभव कार्यक्रम (आरएडब्ल्यूई – 2024-25) के अंतर्गत मुडजा गांव में मृदा परीक्षण पर प्रदर्शन के साथ किसानों को मार्गदर्शन दिया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन किया तथा किसानों को इसका महत्व समझाया। किसानों की शंकाओं का समाधान किया गया। छात्राओं ने किसानों को
मृदा परीक्षण क्यों किया जाए,…
मृदा परीक्षण की आवश्यकता क्यों है?….
मृदा परीक्षण हमें क्या जानकारी देता है?….. मृदा परीक्षण कब करें? और
मृदा परीक्षण की सही वैज्ञानिक विधि क्या है? इस सम्बन्ध मे जानकारी दी।
छात्रों ने बताया कि, मृदा परीक्षण से
मिट्टी में प्राथमिक पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम) और दुय्यम (कैल्शियम,मैग्नीशियम, सल्फर) पोषक तत्व उपलब्ध हैं।
इसके आधार पर उर्वरक की सही मात्रा निर्धारित की जा सकती है। उत्पादन में वृद्धि होती है, तथा अनावश्यक खर्चा बचाया जा सकता है।
रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए जैविक खाद, गोबर की खाद (एफवाईएम), कम्पोस्ट और हरी खाद के लाभों के बारे में भी बताया गया। मिट्टी के प्रकार, गुण और फसलवार उर्वरक प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई।
इस उपक्रम में किसान तुलारामजी राऊत, अविनाश चौधरी, भूषण बारसिंगे और अन्य स्थानीय किसानों ने भाग लिया।
इस उपक्रम के सफलता में कु.ऋतुजा भैंसारे, कु.किरण बोरकर, कु.मानसी गुरनुले, कु .स्नेहल आगबत्तनवार, कु. प्रांजलि पंचभाई का विशेष योगदान रहा।
कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. विष्णुकांत टेकाले के विशेष मार्गदर्शन में डॉ. अक्षय इंगोले (कार्यक्रम अधिकारी), डॉ. युवराज खोबरागड़े (कृषि अनुसंधान केंद्र, सोनापुर), डॉ. अश्विनी गायधनी, श्री देवानंद कुसुम्बे आदी ने भी मार्गदर्शन किया।