42 वर्षों बाद नवभारत विद्यालय के सत्र 1982 -83 बैच के छात्रों ने स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया

 

शिक्षक और छात्र के बीच का रिश्ता फिर से मजबूत हुआ, स्कूल का प्रांगण पुरानी यादों से जगमगा उठा

मूल : ( मेहुल मनियार )

      “स्कूल के दिन जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं”, और यह बात 13 सितंबर को नवभारत विद्यालय, मूल में चरितार्थ हुई। वर्ष 1982-83 में कक्षा 10 में पढ़ने वाले छात्रों का बैच 42 साल बाद एक साथ आया और अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए एक भव्य “आभार समारोह और स्नेह मिलन सम्मेलन” का आयोजन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11:30 बजे वृक्षारोपण से हुई। इस गतिविधि के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इसके बाद पूर्व छात्रों के लिए पंजीकरण और स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।

दीप प्रज्वलन और प्रार्थना के बाद, उपस्थित सभी पुर्व छात्रों ने अपने गुरुओं को शाल और श्रीफल भेंट कर कृतज्ञता व्यक्त की।

सम्मानित शिक्षकों में , एस. डी. धर्माधिकारी, एस. के. बख्शी, जी. एम. नागापुरे, बी. ए. खान, पी. वाई. पुलकवार, डी. के. बंडावार, पी. के. वीरगमवार, श्रीमती के.जी.बोडखे- का विशेष सत्कार किया गया।

दिवंगत शिक्षकों और छात्रों को श्रद्धांजलि

समारोह के दौरान, उपस्थित लोगों ने अपने दिवंगत शिक्षकों और सहपाठियों की स्मृति में एक क्षण का मौन रखा। भावुक माहौल में, सभी ने उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

शिक्षकों और छात्रों ने अपने स्कूल के दिनों की यादों, कहानियों, कक्षा की शरारतों और प्रतियोगिताओं से माहौल को भर दिया। कई छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों को दिया और बताया कि, उनके मार्गदर्शन में उनका जीवन कैसे बदल गया। छात्रों ने कहा, “उस समय के अनुशासन, प्रेम और शिक्षा की बदौलत ही आज हम समाज में स्थापित हैं।”

कार्यक्रम के अंत में, आयोजित भोजन का आनंद लेते हुए, पुरानी दोस्ती को नए पंख मिले।

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक राजेंद्र राजुरकर, रवींद्र बोकारे, महेश टहलियानी और उनके सहयोगियों ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। राजुरकर ने कहा, “अपने गुरुओं से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है।”
यह स्नेह मिलन महज़ एक आयोजन नहीं, बल्कि स्कूली जीवन की मधुर यादों का एक जीवंत सफ़र था। यह गुरु-शिष्य के रिश्ते की गर्मजोशी को फिर से जीने और समाज में शिक्षा के महत्व को एक बार फिर उजागर करने का एक पल था।