Category: कृषि सप्ताह
written by Chandrakant Maniyar | July 7, 2025

मूल: ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और हरित क्रांति के प्रणेता स्व. वसंतराव नाइक की जयंती के अवसर पर हर साल 1 जुलाई 2025 को “कृषि दिवस” मनाया जाता है। इसके तहत 1 जुलाई से 7 जुलाई तक का सप्ताह किसानों के बांधों का दौरा करके “कृषि सप्ताह” के रूप में मनाया जाता है। इस संबंध में, कृषि सप्ताह के अवसर पर, मूल के कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे के मार्गदर्शन में, कृषि महाविद्यालय के विषय विशेषज्ञों ने, 04 जुलाई, 2025 को मूल तहसील के ग्राम मरेगांव में सीधे किसानों के बांधों का दौरा किया। इस अवसर पर मरेगांव के किसानों के साथ-साथ कृषि महाविद्यालय, मूल के विभिन्न विषयों के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। प्रारंभ में खरीफ सीजन में धान, तुअर, अन्य सब्जी फसलों और पशुपालन से संबंधित किसानों की समस्याओं को जाना गया। उद्यानिकी विषय विशेषज्ञ प्रा.डॉ. आर.पी. गजभिये ने किसानों को खरीफ सीजन में शुरू होने वाली धान, तुअर और अन्य सब्जी फसलों की अधिक पैदावार देने वाली खेती तकनीक के बारे में मार्गदर्शन दिया। पशुपालन और डेयरी विज्ञान विशेषज्ञ सहायक प्रा. डॉ. एस.आर. मुन्नरवार ने पशुओं का टीकाकरण और दुधारू पशुओं की देखभाल के बारे में किसानों को विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
मृदा विज्ञान विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक डॉ. अक्षय इंगोले, ने धान की फसल में खाद देने की विधि बताई तथा विश्वविद्यालय में तरल रूप में उपलब्ध सूक्ष्म पोषक तत्वों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वनस्पति रोग विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रवीणा बरडे, ने धान की फसलों पर लगने वाले अगेती झुलसा, डाउनी फफूंद तथा किनारा झुलसा जैसे रोगों पर किए जाने वाले उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने फसल में तना तथा जड़ सड़न रोगों पर नियंत्रण के लिए परजीवी जैविक कवकनाशी ट्राइकोडर्मा के महत्व के बारे में भी किसानों को समझाया। कृषि विद्या विषयतज्ञ सहायक प्राध्यापक मोहिनी पुनसे, ने धान की फसल के बीज प्रसंस्करण, नर्सरी प्रबंधन तथा खरपतवार नियंत्रण के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी दी। महाविद्यालय की कृषि विस्तार शिक्षा विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक मनीषा लवणकर ने किसानों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित तथा विभिन्न विषयों को शामिल करने वाले कृषि समाचार पत्र के बारे में जानकारी दी तथा विश्वविद्यालय की तकनीक का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने के बारे में किसानों को विस्तृत मार्गदर्शन दिया।