मूल के कृषि महाविद्यालय द्वारा कोटगल ग्राम में उत्साहपूर्ण माहौल में कृषि दिवस मनाया गया

 

मूल:  ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )
ग्रामीण कृषि अनुभूति कार्यक्रम के अंतर्गत स्वर्गीय वसंतराव नाईक की जयंती के अवसर पर कृषि महाविद्यालय मूल के कृषिदूत एवं कृषि कन्याओं द्वारा कोटगल में 1 जुलाई 2025 को कृषि दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाराष्ट्र राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरित क्रांति के प्रणेता स्व. वसंतराव नाईक एवं डॉ. पंजाबराव उपाख्य भाऊसाहेब देशमुख की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय मूल के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे अध्यक्ष के रूप में उपस्थित थे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में कोटगल गांव की सरपंच श्रीमती ममता दुधबावरे, उपसरपंच सौ .तेजप्रभा पंकज भोयर, जिला परिषद स्कूल की प्रधानाध्यापिका श्रीमती अलका जुवारे एवं कृषि महाविद्यालय मूल के प्राध्यापक, प्रगतिशील कृषक लक्ष्मण काबेदार एवं अन्य किसान उपस्थित थे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना कृषिदूत समय उपरीकर ने रखी। तत्पश्चात महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में हरित क्रांति के अग्रदूत एवं सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले महान वसंतराव नाइक की जीवनी पर प्रकाश डाला।
कृषि दिवस का महत्व कृषिदूतों और कृषिकन्या ओं को समझाया गया और कृषिदूतों और कृषि कन्याओं को किसानों तक तकनीक पहुंचाने की चुनौती दी गई, ताकि वे अपनी उत्पादन लागत कम करके अपनी आय बढ़ा सकें। कोटगल गाँव की सरपंच सौ .ममता दुधबावरे ने ग्रामीण कृषि अनुभव कार्यक्रम के तहत कृषिदूतों और कृषिकन्याओं द्वारा गाँव में कार्यान्वित की जा रही विभिन्न गतिविधियों की प्रशंसा की। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ दीं। बागवानी विषयतज्ञ के प्रोफेसर डॉ. आर. पी. गजभिये ने सभी किसानों को कृषि दिवस के अवसर पर शुभकामनाएँ दीं और किसानों को आश्वस्त किया कि, यदि किसान आधुनिक तकनीक का उपयोग करके अपनी कृषि आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की चुनौती लेते हैं, तो कृषि दिवस सही मायने में मनाया जाएगा। उसके बाद, महाविद्यालय की छात्रा कु.ऋतुजा भैसारे ने कृषि दिवस के बारे में अपनी राय व्यक्त की और ग्रामीण कृषि अनुभव कार्यक्रम के तहत गाँव में की गई विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। मृदा शास्त्र विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक डॉ. अक्षय इंगोले ने किसानों को मृदा परीक्षण कैसे और क्यों करें, इसकी वैज्ञानिक विधि और स्वास्थ्य कार्ड के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया तथा तद्नुसार धान की फसलों के एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। साथ ही विश्वविद्यालय में तरल रूप में उपलब्ध सूक्ष्म पोषक तत्वों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
सहायक प्रोफेसर एवं पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. गीतांशु डिंकवार ने धान की फसलों को प्रभावित करने वाले कीटों एवं रोगों के एकीकृत प्रबंधन तथा इस उद्देश्य के लिए जैविक कीट एवं रोग नियंत्रण के लाभों पर किसानों को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।
बागवानी विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक डॉ. अश्विनी गायधनी ने वसंतराव नाइक के कृषि में योगदान के बारे में जानकारी दी और कहा कि, ग्रामीण कृषि अनुभव पाठ्यक्रम के तहत कृषिदूत और कृषि छात्राएं अपने कृषि अनुभव किसानों के साथ साझा करें और उनकी जरूरत की पूरी फसल की खेती की लागत का लेखा-जोखा तैयार करें। महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका मनीषा लवणकर ने विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के लिए प्रकाशित तकनीकी रूप से उन्नत कृषि पत्रिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी और कहा कि, उन्हें अपने उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करने के लिए नई तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में कुल 39 किसान, 10 विषय विशेषज्ञ और 26 विद्यार्थी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का संचालन कृषि राजदूत बलवीर जुनगरी और कृषि छात्रा कु.मानसी गुरनुले ने किया । कृषि राजदूत चैतन्य कापगते ने उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को उचित तरीके से सफलता के लिए ग्रामीण कृषि अनुभव कार्यक्रम के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अश्विनी गायधनी ने मार्गदर्शन दिया।