छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन बना ठेकेदारों के “जी का जंजाल”

छत्तीसगढ के पी.एच.ई ठेकेदार सभी जिलों मे कर रहे काम बंद आंदोलन 

(छत्तीसगढ राज्य)

केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजनाओं मे से एक जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा हर घर नल कनेक्शन का कार्य अपने अंतिम पडाव मे है। परन्तु,जनवरी 2024 मे अंतिम भुगतान पश्चात्‌ ठेकेदारों को अभी तक चालित देय की शत प्रतिशत राशि नहीं मिली है।उक्त समय से ठेकेदारों का भुगतान लंबित है। मार्च महीने मे उन्हें चालित देय का आधा भुगतान ही आवंटित किया गया था।कुछ माह पश्चात्‌ उसी चालित देय की 20 प्रतिशत राशि आवंटित की गई बावजूद उसी भुगतान की 30 प्रतिशत राशि अभी भी शेष है।बहरहाल, ठेकेदारों द्वारा कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।परन्तु रोज नए नए नियम जारी कर भुगतान मे विलंब करने के बहाने खोजे जा रहे हैं, ऐसी चर्चा है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा भुगतान मे किए जा रहे विलंब से सभी ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति नाजुक हो गई है। आगे कार्य करने मे ठेकेदार असक्षम नजर आ रहे हैं। एक ओर विभाग को उक्त मिशन को दिसम्बर तक पूर्ण करने की जल्दबाजी है किन्तु भुगतान मे विलंब के कारण यह लक्ष्य पूर्ण हो पाना असंभव दिख रहा है।पता नहीं, किस साजिश के तहत,राशि आवंटित नहीं की जा रही है,यह दबे स्वर मे बोला जा रहा है।

हाल ही मे, नए नियम अनुसार जिन ठेकेदारों का 70 प्रतिशत एवं उससे अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है और हर घर जल वितरण भी सुचारू है उन्हीं अनुबंध को शेष 30 प्रतिशत राशि आवंटित की जाएगी ऐसा फरमान निकाला गया है। हालांकि, जिन ठेकेदारों का 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है परंतु स्त्रोत नहीं होने की वज़ह जल वितरण नहीं किया जा रहा उन्हें भुगतान नहीं किया जाएगा।इस नियम को सिरे से खारिज करते हुए ठेकेदारों ने इस पर आपत्ति जतायी है क्योंकि अनुबंध अनुसार स्त्रोत की जिम्मेदारी विभाग की है एवं प्रगतिरत कार्यो का चालित देय लेना भी ठेकेदारों का अनुबंध अनुसार अधिकार है।

हर रोज़ ठेकेदारों पर थोपे जा रहे नियमों मे अनुबंध की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है।जिसमें मनोनयन क्लोरीनेटर लगाना, जो की अनुबंधित कार्य के बीच अवधि मे आदेश निकाल कर बदलवा दिया गया। स्टॅडपोस्ट पर क्रमांक डालकर लोगो पैंट करना।और तो और अभियंता से चालित देय बनाने मे ठेकेदारों को अपनी चप्पल घिसवानी पड़ती हैं। काफी अनुबंध सालभर से अधिक समय पहले पूर्ण होने पश्चात्‌ भी अंतिम देय नहीं बनाया जा रहा। बिजली कनेक्शन लेने हेतु जनप्रतिनिधि की जी-हुजूरी करना एवं बिजली विभाग की उदासीनता भी ठेकेदारों के नाक मे दम भर देती है।अनुबंध के अलावा काफी सारे अतिरिक्त कार्य करवाने के बावजूद भी ठेकेदारों को अधिक भुगतान नहीं किया जा रहा।

इन सभी समस्याओं के मद्देनजर प्रदेशभर के पी एच ई ठेकेदारो ने विभाग को घेरना शुरू कर दिया है। आगे, इसी प्रकार की आर्थिक उदासीनता विभाग द्वारा दिखाई देती है तो केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर ग्रहण लगने के कयास लगाए जा रहे हैं।