मूल के कृषि महाविद्यालय दीक्षारंभ कार्यक्रम की उत्साह के साथ शुरुआत हुई

मूल ( प्रा. चंद्रकांत मनियार)
छठी डीन समिति की सिफारिशों के अनुसार, कृषि महाविद्यालय, मूल में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रवेश लेने वाले प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए ‘दीक्षारंभ’ नामक एक विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया गया। इस विशेष पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों का महाविद्यालय जीवन में स्वागत करते हुए, उन्हें कौशल आधारित शिक्षा, कैरियर उन्मुख शिक्षा और प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास प्रदान करने और उनके छिपे हुए गुणों को विस्तार देने के लिए इस पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि महाविद्यालय, मूल के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे ने की। कार्यक्रम के प्रारंभ में शिक्षा प्रभारी डॉ. एस. वाई. कडू ने महाविद्यालय के बारे में जानकारी देते हुए ‘दीक्षारंभ’ नामक विशेष पाठ्यक्रम का परिचय दिया। इसके बाद सहायक प्राध्यापक डॉ. एस. आर. मुन्नरवार ने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, युवा महोत्सवों, आविष्कारों, खेल प्रतियोगिताओं और वार्षिक सामाजिक समारोहों आदि के बारे में जानकारी दी तथा विद्यार्थियों से इनका लाभ उठाने की अपील की।
डॉ. वी. एस. साखरकर और डॉ. विशाखा डोंगरे ने अपने मुख्य भाषणों में कृषि शिक्षा के महत्व, छात्रों के समक्ष अवसरों और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। डॉ. ए. जे. इंगोले, डॉ. ए. जे. डेरे, डॉ. बी. ए. ठाकरे और डॉ. पी. एस. घुबे ने छात्रों के साथ बातचीत की और उन्हें विषय पर मार्गदर्शन दिया।
प्राध्यापक डॉ. आर. पी. गजभिये ने नई शैक्षिक नीति की आवश्यकता और महत्व की व्याख्या बताते हुए इसका उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है, इस बारे मे बताया। उन्होंने छात्रों को प्रतिष्ठित कृषि शिक्षा का महत्व के बारे मे जानकारी दी। उन्होंने संस्थानों में सीखने के महत्व पर जोर दिया।
अध्यक्षीय भाषण में, कृषि महाविद्यालय, के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे ने
नव प्रवेशित छात्रों को बधाई देते हुए विशेष मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि, अंत इस शब्द का अर्थ अंत नहीं है, बल्कि प्रयास कभी नहीं मरता है। इसका मतलब यह है कि प्रयास कभी ख़त्म नहीं होते।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं, इस बारे मे सहयोग का आश्वासन दिया।
डॉ. ए. जे. इंगोले के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।