प्रगतिशील किसान आनंदराव शेंडे ने सिखाए कम लागत में अधिक आय वृद्धि के गुर

मूल ( मेहुल मनियार )

कम लागत में ज़्यादा आय प्राप्त करने के लिए किसानों को पारंपरिक खेती छोड़ देनी चाहिए।आज के हालात में प्रायोगिक खेती बहुत ज़रूरी है। प्रायोगिक खेती में मज़दूरी और बीज बोने की लागत बहुत कम होती है, इसलिए ज़रूरी है कि किसान प्रायोगिक खेती की ओर रुख करें, ऐसा मुल के प्रगतिशील किसान आनंदराव शेंडे ने बताया।


मूल तहसील के ग्राम भवराला के उन्ही के खेत परिसर में आयोजित एक पत्र परिषद में आनंदराव शेंडे ने कहा कि ,भवराला में उनके पास 12 एकड़ जमीन है, वे पिछले 14 वर्षों से खेत में धान की फसल से आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने पिछले 8 वर्षों से प्रयोगात्मक खेती की ओर रुख किया। पारंपरिक खेती के लिए प्रति एकड़ 30 किलो बीज की आवश्यकता होती थी, अब प्रयोगात्मक खेती के लिए केवल 5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।उन्होंने कहा कि श्रम और लागत भी बहुत कम है।
जबकि परंपरागत खेती करने मे
रोपण के समय प्रति फीट 8 से 10 चॉप लगते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी खेती में प्रति फीट केवल 1 चॉप लगाए है, जिससे खेत में फसलों पर कोई बीमारी नहीं लगती है। उन्होंने 12 एकड़ खेत में ‘वर्षा’ नामक बीज लगाए हैं, जो 150 दिनों में पक जाते हैं। उन्होंने कहा कि, धान की फसल अगले सप्ताह पूरी हो जाएगी, बिना किसी रासायनिक कीटनाशक का उपयोग किए, आनंदराव शेंडे पूरी तरह से जैविक उर्वरकों का उपयोग करके खेती कर रहे हैं।उन्होंने सलाह देते हुए बताया कि,खेत में फसल की बर्बादी रोकने हेतु ‘बोरू’ उगाए और 1 महीने बाद उसमें 1 बैग सुपर फॉस्फेट डालें।इस सड़ी हुई खाद पर मात्र 2,700 रुपये का खर्च आता है,जो 12 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त खाद का कार्य करेगा और आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भवराला क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि,  अगर सरकार गोसीखुर्द नहर से पानी छोड़ती है ,तो किसानों को दूसरी फसल लेने मे सुविधा मिल पाएगी। इस अवसर पर जल वितरण समिति के अध्यक्ष नरेंद्र घोड़मारे, नत्थूजी नन्नावरे, रमेश गायकवाड़, सचिन कामड़े आदि किसान उपस्थित थे।