Category: संत रोहिदास जयंती
written by Chandrakant Maniyar | February 15, 2025

मूल ( मेहुल मनियार )
मातंग समाज युवा संगठन की ओर से मूल के ताड़ाला मार्ग पर संत रोहिदास उर्फ रविदास जयंती समारोह बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
इतिहास में संत रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा के दिन दर्ज है और इस साल माघ पूर्णिमा 12 फरवरी, बुधवार को पड़ी इसलिए यह कार्यक्रम इसी दिन मनाया गया।
ग्राहक संगठन के अध्यक्ष दीपक देशपांडे की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रमेश मांदाडे के साथ प्रा. डॉ. किरण कापगते, मातंग संगठन के महाराष्ट्र राज्य प्रमुख समय्या पोचमपसुल्ला के साथ पूर्व नगरसेविका सुनीता बोलिवार, शंकर नक्कावार, शामराव लाटेलवार, तुलशीराम बोलिवार उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत संत रविदास की छवि पर पूजा-अर्चना कर एवं माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छों से किया गया।
संगठन के जिला अध्यक्ष भीमराव इटकेलवार ने प्रस्तावना रखी। समय्या पोचमपसुल्ला ने संगठन के माध्यम से चल रहे कार्यों की जानकारी दी। राज्य सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया पर चर्चा करते हुए कहा कि, हमारे समुदाय को जल्द ही आरक्षण दिलाने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत चल रही है ।उन्होंने जोर देकर कहा कि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की सरकार इस बारे मे सहयोग करने की कोशिश कर रही है।
जहां हमारे समुदाय के 20-30 घर हैं, वहां एक सामुदायिक मंदिर बनाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है, ऐसा बताया। लेकिन उन्होंने खेद व्यक्त किया कि ,हमारा समुदाय पूरी ताकत से संगठन का समर्थन नहीं कर रहा है और हमारी मांगों के लिए एक साथ लड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर रमेशजी मांदाडे, और प्रा.डॉ.किरण कापगते ने किसी भी भ्रम का शिकार हुए बिना अपने समाज को उत्थान और प्रगति का रास्ता दिखाने के लिए सामाजिक जागरूकता और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
अध्यक्षीय भाषण में दीपक देशपांडे ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, हमारे समाज में सफलता प्राप्त करने के लिए साधु-संतों की शिक्षाओं को ध्यान में रखना जरूरी है कि, अपने काम पर विश्वास रखें और अपने काम पर शर्म न करें, अपने काम पर विश्वास करें और मुफ्त की चीजों का अनुसरण न करें।
कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन सावली के बंडू गोलकुंडावार ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातंग समाज के भाई-बहनों ने भाग लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम के बाद समाज के सभी सदस्यों ने भोजन का आनंद लिया, और ढोल की आवाज पर नाच-गाकर त्योहार मनाया।