Category: किसान शास्त्रज्ञ मंच बैठक
written by Chandrakant Maniyar | December 19, 2024
मूल ( चंद्रकांत मनियार)
19 दिसंबर, 2024 को कृषि महाविद्यालय, मूल द्वारा चौबीस वी किसान वैज्ञानिक मंच की बैठक, तहसील के ग्राम भेजगांव में संपन्न हुई। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ.विष्णुकांत टेकाले, किसान मंच के अध्यक्ष विजय गुरुनुले, महाविद्यालय के विषय विशेषज्ञ , कृषि पर्यवेक्षक एवं कृषि विभाग के सहायक, साथ ही मंच के सदस्य एवं किसान उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से “ग्रीष्मकालीन/दुबार धान फसल की योजना एवं रबी फसल में लगने वाले कीट एवं रोग” विषय पर चर्चा की गई। कृषि महाविद्यालय, मूल के सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ. विष्णुकांत टेकाले ने कहा कि, किसानों को उद्यमी के रूप में खेती करनी चाहिए, हमारे क्षेत्र में बैंगन, टमाटर उगाए जाते हैं, लेकिन मेथी, धनिया उगाना बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए इससे उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि सब्जियां नागपुर और अन्य स्थानों से आती हैं। इसलिए किसानों को बाजार का अध्ययन करके सब्जी की फसलें लगानी चाहिए। इस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता के कारण ग्रीष्मकालीन मूंगफली किस्म TAG-24 की खेती करना आवश्यक है तथा मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने पर जोर देना आवश्यक है।
कृषि विश्वविद्यालय अकोला में 27 से 29 दिसंबर 2024 तक एग्रोटेक 2024 का आयोजन किया गया है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि, वे इसमें भाग लें और अन्य किसानों को भी इसके बारे में बताएं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषिसंवादिनी एवं कृषिपत्रिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
महाविद्यालय के उद्यान विशेषज्ञ डाॅ. अश्विनी गायधनी ने सब्जी फसलों में लगने वाले कीट एवं रोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें प्याज की फसल में नर्सरी ब्लाइट रोग के लिए बुआई के 15 दिन बाद आधा ग्राम थीरम प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधे की जड़ में मिट्टी में मिला देना चाहिए।करपा रोग होने पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। साथ ही पत्तागोभी की फसल में रस सोखने वाले कीड़ों के लिए डाइमिथोएट 30 प्रतिशत तरल 13.0 मि.ली. ली. 10 लीटर पानी लेकर छिड़काव करें। साथ ही विस्तार से जानकारी दी गई कि, करपा रोग होने पर 15 ग्राम कॉपर फफूंदनाशक को 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ प्रो. मोहिनी पुनसे ने गेहूं की फसल में उर्वरक, खरपतवार, पानी, कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, धान की फसल पर कीट प्रबंधन के लिए फसलों का चक्रण करना आवश्यक है तथा जैविक पदार्थ, जीवामृत, दशपर्णी अर्क एवं निम्बोली अर्क कैसे तैयार करें, इस पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। कृषिविद्या विषयतज्ञ प्रा .देवानंद कुसुम्बे ने दुबार/ग्रीष्मकालीन धान की फसल की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए ग्रीष्म ऋतु में पानी, उर्वरक, कीट और रोग प्रबंधन जैसी रोपण तकनीक पर मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर कृषि मंच के सदस्यों ने प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए कृषि संबंधी प्रश्नों का प्रासंगिक उत्तर दिया। मंच की बैठक के बाद भेजगांव के अरविंद शेंडे, के खेत में सब्जी की फसल देखने भेट देकर मार्गदर्शन दिया। कृषि विभाग के पी. एन. पराते,और आर. एस.जाधव ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का भी मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम में 34 किसानों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन प्रा. मनीषा लवनकर ने किया।