कृषि महाविद्यालय द्वारा कृषक वैज्ञानिक मंच की 33 वी बैठक का आयोजन

मूल ( प्रा.चंद्रकांत मनियार)

यहां के कृषि महाविद्यालय द्वारा 26 नवंबर, 2024 को ग्राम मरेगांव में किसान वैज्ञानिक मंच की 23वीं बैठक का आयोजन किया। इस अवसर पर ग्राम मरेगांव की सरपंच श्रीमती ज्योत्सना पेंदोरे,पुलिस पाटिल श्री. पुंडलिक जवादे, तथा अन्य किसान और कृषि महाविद्यालय, मुल के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से “रबी फसल प्रबंधन” विषय पर चर्चा की गई। सबसे पहले महाविद्यालय के कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ प्रा. मोहिनी पुनसे ने गेहूं की फसल के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। जिसमें फसल की नाजुक अवस्था, जैसे ताज के कारण अंकुर निकलने की प्रारंभिक अवस्था, अधिकतम अंकुर निकलने की अवस्था, फूल आने की अवस्था, दूधिया दाने की अवस्था के दौरान पानी का तनाव नहीं होने देना चाहिए। यदि ताज सड़ना शुरू हो जाए और पानी की कमी हो, तो किसानों की पैदावार 33 प्रतिशत तक गिर सकती है। इसलिए किसानों को गेहूं की फसल में पानी के उचित प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, यदि किसानों के पास पानी की उपलब्धता कम है तो सरसों, अलसी जैसी कम पानी वाली तिलहनी फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। किसानों ने कहा कि मुख्य पोषक तत्वों के साथ-साथ शुष्क पोषक तत्व भी उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
वनस्पतिरोग विषयतज्ञ डॉ. गीतांश डिंकवार ने बताया कि, फसल चक्र अपनाने से बीमारियों और कीटों का प्रकोप कम हो जाता है, इसकी भी जरूरत बताई और मार्गदर्शन भी किया। उन्होंने कहा की चने की बुआई से पहले फफूंदनाशकों से उपचार करने से ब्लाइट, जड़ सड़न, एच जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। एच ए एन पी वी लार्वा के आर्थिक नुकसान के स्तर पर पहुंचने पर प्रति हेक्टेयर 500 रोगग्रस्त लार्वा का अर्क, क्विनालफॉस 25 ई का छिड़काव करें। सी। गेहूं एवं कपास की फसल पर लगने वाले रोगों एवं कीटों के एकीकृत प्रबंधन के बारे में भी मार्गदर्शन दिया। कृषि वैज्ञानिक तज्ञ प्रा.देवानंद कुसुम्बे ने अधिक उपज देने वाली किस्मों, बोने की प्रक्रिया, तनाव नियंत्रण, दोहरी बुआई वाली धान की फसल से प्रचुर उत्पादन प्राप्त करने के लिए पानी के उचित नियोजन पर मार्गदर्शन दिया। साथ ही चना फसल के प्रबंधन, वर्मीकम्पोस्टिंग प्रक्रिया के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। विस्तार शिक्षा विभाग की प्रा. मनीषा लवनकर ने विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के लिए विकसित किये गये विभिन्न एप तथा विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषिसंवादिनी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उपस्थित दो किसान डाॅ. पण्डेकृवि का संपूर्ण कृषि तकनीक युक्त कृषि संचारक भी खरीदा गया। कार्यक्रम में कुल 31 किसानों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया. प्रा. मनीषा लवणकर ने इस कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन किया।