Category: किसान शास्त्रज्ञ मंच बैठक
written by Chandrakant Maniyar | October 30, 2025

मुल ( प्रा चंद्रकांत मनियार )
कृषि महाविद्यालय, मुल द्वारा 35 वी किसान वैज्ञानिक मंच की आयोजित बैठक बुधवार, 29 जुलाई, 2025 को मूल तहसील के ग्राम सिंतला, में संपन्न हुई। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय, मुल के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे, प्रगतिशील कृषक श्री विजय गुरुनुले, श्री घनश्याम वासेकर, अन्य कृषक एवं कृषि महाविद्यालय के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। इस बैठक में चर्चा का मुख्य विषय “धान की कटाई के बाद रबी मौसम में तिलहन फसलों का रोपण एवं प्रबंधन” था। इसमें महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे ने कृषकों को धान की कटाई के बाद रबी मौसम में परती क्षेत्रों में तिलहन फसलों के रोपण के आर्थिक महत्व के बारे में समझाया। साथ ही, उन्होंने अलसी और सरसों जैसी तिलहनी फसलों के स्वास्थ्य महत्व के बारे में भी बताया। उद्यान विद्या के सहयोगी प्राध्यापक डॉ. आर. पी. गजभिये, ने किसानों को पारंपरिक धान की फसलों के बजाय फलदार वृक्षों और कटहल, शरीफा, जबोल और शेवगा जैसी सब्जी फसलों की खेती के लिए उन्नत तकनीक के उपयोग पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया, जिन्हें कम लागत में उगाया जा सकता है और अधिकतम आय प्राप्त की जा सकती है। कृषि विद्या विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल ठाकरे, ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने चावल की कटाई के बाद रबी मौसम में अलसी और सरसों जैसी तिलहनी फसलों की खेती और प्रबंधन की पाँच-सूत्री विधि पर भी मार्गदर्शन किया। चावल की कटाई के बाद उपलब्ध नमी का लाभ उठाकर इन फसलों की खेती करना संभव है और इससे किसानों को अधिक आर्थिक लाभ हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों फसलें स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
कीट विज्ञान विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक डॉ. भूषण ए. ठाकरे ने अलसी, सरसों और कुसुम की फसलों पर मिलीबग और एफिड्स के एकीकृत कीट प्रबंधन के लिए पीले चिपचिपे जाल, कामगंध जाल, ट्राइकोकार्ड आदि का उपयोग करने की सलाह दी। वनस्पति रोगशास्त्र विषयतज्ञ् सहायक प्राध्यापक डॉ. गीतांशु डीन्कवार ने अलसी और कुसुम की फसलों पर अगेती झुलसा रोगों के खिलाफ किए जाने वाले उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को झुलसा और जड़ सड़न रोगों को नियंत्रित करने के लिए परजीवी जैविक कवकनाशी ट्राइकोडर्मा के महत्व के बारे में समझाया। सहायक प्राध्यापक डॉ. सुवर्णा नगराले ने रबी मौसम के दौरान बीज खरीदते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में कुल 35 किसान एवं 06 वैज्ञानिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन करते हुए सहायक प्राध्यापक डॉ. भूषण ए. ठाकरे ने उपस्थित सभी किसानों एवं कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।