Category: किसान शास्त्रज्ञ मंच बैठक
written by Chandrakant Maniyar | May 21, 2025
मूल 21: ( प्रा चंद्रकांत मनियार )
यहां के कृषि महाविद्यालय, की उनतीसवीं कृषक वैज्ञानिक मंच की बैठक 20 मई 2025 को ग्राम चिमढा में संपन्न हुई। इस अवसर पर चिमढा के प्रगतिशील किसान श्री अरविंद केलज़रकर, श्री धनराज मोहुरले, अन्य किसान और कृषि महाविद्यालय, मुल के विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से “खरीप फसलों की योजना” विषय पर चर्चा की गई। सबसे पहले कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. विष्णुकांत टेकाले ने किसानों को खरीफ सीजन की शुरुआत में कृषि खर्च कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में मार्गदर्शन दिया। इस मौके पर किसानों को कहा कि, सही तरीके से खेती करना, मिट्टी की जांच, उपयुक्त प्रजाति का चयन, बीज प्रसंस्करण करना जरूरी है। उसी प्रकार, विकसित कृषि संकल्प अभियान 29 मई से 12 जून 2025 तक आयोजित किया जा रहा है और यह गांव-गांव तक कृषि प्रौद्योगिकी का प्रसार करेगा, ऐसा बताया।
इसका आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य संबंधित संस्थानों की भागीदारी से किया जा रहा है। इस अवसर पर किसानों को इस अभियान में शामिल होने की अपील की गई। इसके बाद कृषि विज्ञान की सहायक प्राध्यापिका मोहिनी पुनसे ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के लिए मिट्टी के नमूने लेने, बुवाई से पहले धान में बीज अंकुरण क्षमता का परीक्षण करने तथा नमक के घोल से धान की फसल को उपचारित करने के फायदे बताए। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी गायधनी ने खरीफ सीजन के प्रारंभ में नर्सरी में मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी सब्जी फसलों की देखभाल, अन्य बेल वाली फसलों की खेती और सेवगा लगाने की तकनीक पर मार्गदर्शन दिया। इसके अलावा, नये बाग लगाने (आम, बोर, सीताफल, आदि) और फूलों की खेती के बारे मे प्रोत्साहित किया गया। इसी प्रकार, जैविक मल्च के महत्व से भी किसानों को अवगत कराया गया। जो सामान्य परिस्थितियों में सब्जी फसलों के लिए आवश्यक है।
वनस्पति रोग शास्त्र विशेषज्ञ डॉ. प्रवीणा बरडे ने इस अवसर पर किसानों को यह भी बताया गया कि राइजोबियम जैसे जैविक उर्वरकों से बीज उपचार करने से फसल रोग मुक्त रहती है। उन्होंने खेतों से निकलने वाले पराली और कचरे को जैविक डीकंपोजर का उपयोग करके अच्छे उर्वरक में बदलने के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। कीटविज्ञानी भूषण ठाकरे ने खरीफ मौसम के दौरान धान, कपास और सब्जी फसलों को प्रभावित करने वाले कीटों के प्रबंधन पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
कपास की फसलों में गुलाबी इल्ली तथा धान की फसलों में तना छेदक के लिए बुवाई-पूर्व अनुप्रयोगों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। किसानों को अन्य मित्र कीटों और जैव-कीटनाशकों जैसे ट्राइकोग्रामा (परजीवी कीट), बिवेरिया और मेटारिज़ियम के लाभों के बारे में भी जागरूक किया गया। कृषि विद्या विशेषज्ञ के सहायक प्राध्यापक देवानंद कुसुम्बे, ने धान की खेती के लिए नर्सरी स्थापित करते समय ध्यान रखें, सही किस्म का चयन करें , निराई, खाद और पानी देने की योजना कैसे बनाएं, इस पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इस अवसर पर श्री. चिमढा गांव अरविंद केलजरकर और श्री धनराज मोहुर्ले को कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित वर्मीकम्पोस्ट भेंट किया गया। गांव में वर्मीकम्पोस्ट परियोजना शुरू करने का भी अनुरोध किया गया।
इस कार्यक्रम में कुल 29 किसान और 7 वैज्ञानिक शामिल हुए थे। कृषि विस्तार शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिका मनीषा लावणकर ने कार्यक्रम का संचालन किया और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
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