Tuesday, April 21, 2026
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मूल के कृषि महाविद्यालय में कृषि शिक्षा दिवस मनाया गया

 

मूल
कृषि महाविद्यालय, मूल में 03 दिसम्बर 2024 को “कृषि शिक्षा दिवस” ​​मनाया गया। युवाओं में कृषि क्षेत्र के प्रति जागरुकता पैदा करने और भारत के विकास में कृषि के महत्व को समझाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने तय किया कि,भारत के प्रथम राष्ट्रपति और केंद्रीय कृषि मंत्री भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिन को हर साल “कृषि शिक्षा दिवस” ​​​​के रूप में मनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ. वी. एस.टेकाले थे। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने छात्रों को इस दिन कृषि क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने के महत्व और लाभों के बारे में बताया। आपको कृषि का अध्ययन करने का एक शानदार अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि, सभी को कृषि से संबंधित विभिन्न विषयों, मुख्य रूप से बागवानी, मृदा विज्ञान, कीट विज्ञान, विकृति विज्ञान, कृषि अर्थशास्त्र जैसे कृषि विषयों का गहन ज्ञान होना चाहिए। हमारे देश में बड़ी संख्या में लोग कृषि क्षेत्र पर आधारित हैं। मानव जीवन के लिए भोजन एक बहुत बड़ी आवश्यकता है । जिसकी पूर्ति कृषि से ही होती है। कृषि शिक्षा के छात्रों के लिए खाद्यान्न, फल, सब्जी उत्पादन और अन्य कृषि संबंधी गतिविधियों जैसे कृषि इनपुट प्रदान करना, कृषि वस्तुओं का निर्यात, आयात और अन्य कृषि संबंधित व्यवसायों में एक बड़ा अवसर है, ऐसा कहा।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने स्वयं विद्यार्थियों को कृषि उद्यमी बनने की चुनौती दी, जो जरूरतमंद युवाओं को नौकरी की ओर रुख किए बिना कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्यान विभागाध्यक्ष डाॅ. आर.पी. गजभिये ने विद्यार्थियों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न अवसरों के बारे में भी छात्रों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर महाविद्यालय में कृषि स्नातक के छात्र रेवत ढोक ने भी कृषि शिक्षा के अवसर के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए डाॅ. अश्विनी गायधनी ने कृषि दिवस मनाने का उद्देश्य एवं महत्व बताया.

उक्त कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापक तथा छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का संचालन और उपस्थित लोगों को धन्यवाद डॉ. अश्विनी गायधनें ने माना।

Mehul Chandrakant Maniyar
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