Saturday, June 13, 2026
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श्री माता वासवी कन्यका ही मूलशक्ति का प्रतीक – प.पु. श्री स्वामी गोविंद गिरी जी महाराज

श्री माता वासवी कन्यका देवस्थान प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन

मूल

मूल शहर में आर्य वैश्य समाज की आराध्य माता श्री वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर के जीर्णोधार का कार्य पूर्ण होकर शास्त्रोक्त विधि अनुसार भिन्न-भिन्न मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया था।

श्री राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या के कोषाध्यक्ष परम पूज्य श्री स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज की मुख्य उपस्थिति में यह समारोह संपन्न हुआ।सपना मुनगंटीवार के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप यह सुशोभित मंदिर शहरवासियों को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर श्री कन्यका माता मंदिर से कलश यात्रा एवं माता की पालकी निकाली गई जिसमें भारी संख्या मे भक्तजनों की उपस्थिती रही।शहर के मुख्य मार्ग से शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस शोभा यात्रा की जिले के पालक मंत्री सुधीर मुनगंटीवार तथा सपनाताई मुनगंटीवार ने अगुआई की। पूरा शहर भक्तिमय बन चुका था।स्थानीय बाजार चौक में भव्य पंडाल मे परम पूज्य श्री स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के प्रवर्चन का आयोजन किया गया था।

दरअसल,भगवान भिन्न-भिन्न नाम रूप से जाने जाते है,परंतु परमात्मा एक है।इसका दृष्टांत देते हुए उन्होंने कहा बारिश अलग अलग स्थानो पर होने बावजूद उसका जल वसुंधरा से होकर एक ही सागर मे सम्मिलित होता है,तात्पर्य किसी भी ईश्वरीय रूप को पूजने से फल प्राप्ति समान ही होती है।ऐसा, श्री राम मंदिर समिती ट्रस्ट अयोध्या के कोषाध्यक्ष प.पु. श्री स्वामी गोविंद गिरी जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया। स्थानीय बाजार चौक मे आयोजित कन्यका माता मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह मे वे संबोधन कर रहे थे।

राम मंदिर एवं हिन्दुत्व पर उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा की,अयोध्या मे राम मूर्ति स्थापना की खुशी है परन्तु जब तक देश मे राम राज्य नहीं आता तब तक समाधान मिलना असंभव है।अपना कर्त्तव्य निभाना यही धर्म है यह कहते हुए उन्होंने इस मातृभूमि का संरक्षण करने हेतु मतदान अवश्य करने की सलाह दी। हिन्दू समाज के रक्षण हेतु सभी ने अपनी आखें खुली रखनी चाहिए और सही मायने मे हिन्दू समाज की परिभाषा को परखने हेतु धर्मग्रंथ ज्ञानेश्वरी के पसायदान को अवश्य पढ़ना चाहिए।हिंदू धर्म की मूल धारा के बारे में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो में किए भाषण का जिक्र किया।अपने हिंदू धर्म मे सभी देवताओं मे माँ शक्ति का नाम सबसे पहले लिया जाता है क्योंकि एक पुरूष का स्वभाव विवेक पूर्ण होता है परंतु स्त्री का स्वरूप वात्सल्य पूर्ण है।उन्होंने कहा जैसे डर लगने पर पिता की याद आती है वैसे दुख दर्द होने पर माँ की ही याद आती है।बहरहाल,माँ शक्ति की उपासना सबसे ज्यादा कारगर है।

इस समारोह मे शिरकत करने का हेतु बताते हुए उन्होंने कहा,इस कार्यक्रम मे पहुचना सौभाग्यपूर्ण है। माँ वासवी श्री कन्यका माता यह मूलशक्ति का रूप है और मूल शहर मे उनके मूल स्वरूप के दर्शन पाना अलौकिक है।सभी देवो मे सर्वश्रेष्ठ माँ शक्ति ही है। चाहे उसे किसी भी रूप मे पूजा जाए,उसको पूजने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।संपूर्ण विश्व ही शक्ति का अविष्कार है।

इस प्रवचन के अवसर पर जिले के पालक मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, सपना मुनगंटीवार, डॉ. तन्मय बिड़वाई तथा शलाका बिड़वाई मुख्य रूप से उपस्थित थे।मुनगंटीवार दंपति ने महाराज श्री को विट्ठल रुक्मिणी की मूर्ति भेट स्वरूप देकर उनका स्वागत किया एवं समाज के काफी परिवारो द्वारा भी किसी प्रकार की भेंट वस्तु देकर महाराज श्री का स्वागत किया गया। आर्य वैश्य समाज की महिलाओं द्वारा महाराज श्री की आरती की गई।

कार्यक्रम की प्रस्तावना कन्यका माता देवस्थान के अध्यक्ष अजय गोगुलवार ने रखी।संचालन प्रज्ञा जीवनकर तथा मनीषा पडगिलवार ने किया।कार्यक्रम पश्चात्‌ महाभोज का आयोजन किया गया था।उक्त कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन हेतु श्री कन्यका माता देवस्थान के सभी पदाधिकारी एवं आर्य वैश्य समाज के सभी लोगों द्वारा अथक परिश्रम किया गया।

Mehul Chandrakant Maniyar
90396656609039665660
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