Saturday, August 22, 2026
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मूल के कृषि महाविद्यालय में नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम का किया आयोजन

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मूल : ( प्रा चंद्रकांत मनियार )

पंजाबराव कृषि विश्वविद्यालय संलग्नित मूल के कृषि महाविद्यालय में, महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे और उद्यानिकी विभाग के प्रा.डॉ.आर. पी. गजभिये के मार्गदर्शन में नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रा.आर. पी. गजभिये ने की। वर्ष 2025 के लिए नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम का आदर्श वाक्य “एवरीडे हीरोज” है। इस कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा कहा जाता है। महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक, नागेश नवघरे ने, नेत्रदान क्या है? यह कब किया जाता है? आँख के किस भाग का प्रत्यारोपण किया जाता है, इस विषय पर जानकारी देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम के महत्व को समझते हुए, महाविद्यालय के छात्र अभिनव टाले और कु .ऋतुजा भैसारे ने अपने विचार व्यक्त किए। सहायक प्राध्यापक डॉ.विशाखा डोंगरे ने अवयवदान और नेत्रदान के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि, 21वीं सदी में विज्ञान इतना आगे बढ़ गया है कि , किसी व्यक्ति की आँखें और फलस्वरूप दृष्टि लेकर उसे किसी दूसरे व्यक्ति को, यानी किसी ऐसे व्यक्ति को जिसकी दृष्टि नहीं है, आसानी से देना संभव है। मानव शरीर में आँखों का बहुत महत्व है।
आगे कहा कि,मानव शरीर में आँखें बहुत महत्वपूर्ण अंग हैं और किसी कारणवश वे अंधे हो जाते हैं। इस कारण ऐसे लोग दुनिया की खूबसूरती नहीं देख पाते। यह भी कहा कि ,अगर दुनिया की खूबसूरती न देख पाने वाले इन लोगों को आँखें मिल जाएँ, तो वे दुनिया का आनंद ले पाएँगे। डॉ. भूषण ठाकरे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, अगर हम अपनी मृत्यु के बाद भी किसी की मदद कर सकें, तो यह अच्छी बात है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इसमें कोई बुराई नहीं है। प्रा.डॉ. आर. पी. गजभिये, ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि, नेत्रदान दिवस नेत्र विशारद डॉ. आर. ए. भालचंद्र के स्मृति दिवस पर मनाया जाता है।
साथ ही, उन्होंने दृष्टि हानि के कुछ उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी वजहों से, जागरूकता के अभाव में, अंग काम करना बंद कर सकते हैं। एक इंसान के तौर पर, अगर कोई दृष्टि-सम्पन्न व्यक्ति किसी दृष्टिहीन व्यक्ति को नेत्रदान करता है, तो उस व्यक्ति का जीवन निश्चित रूप से सार्थक होगा।
इसके साथ ही, इस बारे में विस्तृत जानकारी दी गई कि कौन नेत्रदान कर सकता है और कौन नहीं। एक साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी नेत्रदान कर सकता है, लेकिन केवल एड्स, हेपेटाइटिस-बी, सेप्टीसीमिया आदि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज नेत्रदान नहीं कर सकते। इसके साथ ही, उन्होंने उपस्थित सभी छात्रों और प्राध्यापकों से नेत्रदान अभियान में भाग लेने और नेत्रदान करने की अपील की।
इस कार्यक्रम में, उपस्थित 70 प्राध्यापकों और छात्रों में से 13 प्राध्यापकों और 13 छात्रों ने नेत्रदान के लिए सहमति व्यक्त की और इसके लिए आवेदन पत्र भी भरा। कार्यक्रम का संचालन प्रा .नागेश नवघरे ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ. खुशाल राठौड़ ने किया। डॉ . राठोड़ ने अपने कॉलेज जीवन के दौरान ऐसे कार्यक्रमों में स्वयंसेवा के अपने अनुभव साझा किए। कृषि महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों ने कार्यक्रम की सफलता में उत्साहपूर्वक योगदान दिया।

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Mehul Chandrakant Maniyar
90396656609039665660
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