Friday, August 21, 2026
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विद्यार्थियों को परिवेश में व्याप्त भावनाओं का अवलोकन कर साहित्य सृजन करना चाहिए…. डॉ . गणेश चव्हाण ने बताया

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मूल ( मेहुल मनियार )

गोंडवाना विश्वविद्यालय गडचिरोली से संबद्ध तथा शिक्षण प्रसारक मंडल, मूल द्वारा संचालित कर्मवीर महाविद्यालय, में “स्मृतिगंध” के वार्षिक अंक का विमोचन समारोह उत्साहपूर्ण एवं यादगार माहौल में संपन्न हुआ।
शिक्षण प्रसारक मंडल के अध्यक्ष एड. अनिल वैरागड़े की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में श्री संत गाडगे महाराज महाविद्यालय, हिंगणा नागपुर के डॉ.गणेश चौहान, सचिव शशिकांत धर्माधिकारी, प्रकाशक और महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनीता वालके , पर्यवेक्षक प्रा. दिनेश बनकर, डॉ. गायकवाड़, प्रा. पडोले, नंदुरकर और मुख्य संपादक डॉ. क-हाडे आदि उपस्थित थे।
डॉ.चव्हाण ने अपने मार्गदर्शन में साहित्य का विषय हमारे चारों ओर है, उसे चुनकर साहित्य का सृजन किया जाना चाहिए।विद्यार्थियों को अधिक संवेदनशील बनने की आवश्यकता है, तभी एक आदर्श समाज का निर्माण हो सकता है, इसके लिए उन्हें शिक्षित और जागरूक होना होगा, वार्षिक पुस्तक विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता का दर्पण और उनकी संवेदनशीलता को दिशा देने वाला माध्यम है, ऐसा बताया।
इस कार्यक्रम के अवसर पर अध्यक्षीय भाषण के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते हुए एड. अनिल वैरागड़े ने कहा कि, महाविद्यालय जीवन केवल परीक्षा और अंकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विचारों के विकास और मूल्यों के संरक्षण का भी है। स्मृतिगंध उस यात्रा का सुगंधित खजाना है। उन्होंने कहा कि स्मृतिगंध वार्षिक अंक के माध्यम से विद्यार्थियों के विचार और भावनाएँ उभरकर सामने आई हैं।
छात्रों को प्रेरित करते हुए तथा वार्षिक पुस्तिकाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सचिव शशिकांत धर्माधिकारी ने मार्मिक वक्तव्य दिया कि ,वार्षिक पुस्तिका महाविद्यालय संस्कृति का प्रतिबिम्ब है तथा यदि हम समय के संकेतों को देखते हुए उस दिशा में कदम उठाएं तो निश्चित सफलता प्राप्त कर सकते हैं।


स्मृतिगंध, विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है, जिससे उनकी रचनात्मकता, जिम्मेदारी और जीवन मूल्य उजागर हुए हैं।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनीता वालके ने प्रकाशन समारोह का परिचय देते हुए आशा व्यक्त की कि, भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब विद्यार्थी शोध करें, पढ़ें-लिखें और अपने विचारों, लेखों, कहानियों, कविताओं और भावनाओं को उत्कृष्ट साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करें। साथ ही, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकें और महापुरुषों की जीवनियाँ भी पढ़नी चाहिए और उनसे अपने व्यक्तित्व में जीवन की नई दिशा और आशा को अपनाना चाहिए।
मुख्य संपादकीय विचार व्यक्त करते हुए डॉ. क-हाड़े ने कहा कि विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक-राजनीतिक और आज के ज्वलंत मुद्दों पर लेखन कर स्मृतिगंधा को और अधिक सुगंधित बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन मराठी विभाग के प्रा. भूषण वैद्य ने और आभार प्रदर्शन सागर मासिरकर ने किया। इस स्मरनीका में निहित लेखों, कविताओं और चित्रों को पढ़कर और देखकर भावी विद्यार्थियों को लेखन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रकाशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसके लिए विद्यार्थियों की ओर से स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया मिली और महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया।

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Mehul Chandrakant Maniyar
90396656609039665660
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