मूल ( मेहुल मनियार)
यहां के कृषि महाविद्यालय के छात्रों की बांस संशोधन तथा प्रशिक्षण केंद्र चिचपल्ली , वन प्रशासन विकास संशोधन तथा व्यवस्थापन प्रबोधिनी चंद्रपुर, श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेई बोटैनिकल गार्डन विसापुर, विभागीय कृषि संशोधन केंद्र तथा कृषि विज्ञान केंद्र सिंदेवाही,कृषि विज्ञान केंद्र , कृषि महाविद्यालय सोनापुर आदी विभिन्न स्थानों में शैक्षणिक भेट का आयोजन किया गया था।
चीचपल्ली के बांस संशोधन केंद्र में करीब 78 बांस की जाति के प्रात्यक्षिक बने हैं।अन्य राज्यों से लाए बीज की बुआई करके बने पौधों को बिक्री हेतु उपलब्ध कराए जाते है। बांस द्वारा जेवरात,तबला,डायरी,खिलौने आदि वस्तुएं बनाई जाती है, उनका प्रात्यक्षिक छात्रों को बताते हुए, विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। इस भेंट के लिए श्री.घ. मेश्राम, श्री व्ही कोसनकर, श्रीमती वर्षा राठौड का सहयोग मिला।
विसापुर के बोटैनिकल गार्डन में स्थित सायंस सेंटर,जैव विविधता सेंटर, बोनसाई उद्यान , गुलाब उद्यान , विज्ञान प्रदर्शनी , म्यूजियम ,पेड़ों की पुरानी जातियां, मत्स्यालय आदि के बारे में भी छात्रों को जानकारी दी गई। 1911 मे स्थापन किए सिंदेवाही के विभागीय कृषि संशोधन केंद्र में छात्रों ने भेंट देकर जानकारी हासिल की। बताया गया कि,126 .8 हेक्टर भूमि में बसे इस केंद्र में 50 हेक्टर भूमि पर बुआई की जाती है।यहां पर धान की 88 जातियां उगाई जाती है। इस केंद्र द्वारा धान की 15 जातियो को विकसित किया गया है। इस केंद्र का लाभ किसानों को अच्छे ढंग से मिलता है इस बारे में डॉ. जी. आर. शामकुवर,डॉ. एम आर वांढरे , ए ए नागदेवे , जी.एस. दांदले, एल.एन .डोंगरवार आदी ने विस्तृत रूप से मार्गदर्शन किया।
आगे,सिंदेवाही के कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी। इस कृषि विज्ञान केंद्र पर हर साल किसानों के लिए 420 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। इसी प्रकार किसानों के लिए कृषि संबंधी विभिन्न प्रशिक्षण आयोजित किये जाते हैं। धान की फसल की किस्मों को विकसित करने में यह केंद्र प्रमुख भूमिका निभाता है।यहां पर अजोला उत्पादन, मुर्गीपालन, वर्मीकम्पोस्टिंग के प्रकल्प चलाए जाते हैं,इस बारे मे डाॅ. विनोद नागदेवते एवं श्री. विजय सिडाम द्वारा जानकारी दी गयी। दोपहर के सत्र में सोनापुर गढ़चिरौली के कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया गया। इस केंद्र ने किसानों के लिए धान पर 327 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन और सोयाबीन फसल पर 200 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन भी आयोजित किए है। साथ ही इस कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि संबंधी विभिन्न प्रशिक्षण भी आयोजित किये जाते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र सोनापुर में फल पौधों की नर्सरी है जहां विभिन्न फलों के पौधे उपलब्ध हैं। वर्तमान में इस नर्सरी में आम,चीकू, अमरूद, काजू, ड्रैगन फ्रूट आदि के पौधे उपलब्ध हैं।इस केंद्र में विभिन्न प्रजातियों की गाय गौशालाओं मे उपलब्ध हैं। इस कृषि विज्ञान केंद्र में एक स्वचालित कृषि वेधशाला है और यह आईएमडी के साथ-साथ देश के विभिन्न वेधशालाओं को साप्ताहिक मौसम की जानकारी प्रदान करता है।
उसके बाद वहीं के कृषि अनुसंधान केंद्र में नर्सरी और अनुसंधान केंद्र के परिसर का दौरा किया। जिसमें छात्रों ने फलों के पेड़ों की विभिन्न किस्मों और उनकी ग्राफ्टिंग विधियों के बारे में जाना। इस अनुसंधान केंद्र में मल्चिंग और बैंगन लगाने के फायदों पर शोध किया जा रहा है। इस अनुसंधान केन्द्र की डाॅ. युवराज खोबरागड़े ने छात्रों को पूरी जानकारी दी।यात्रा के अंतिम चरण में, छात्रों ने यहां के कृषि महाविद्यालय का दौरा किया। उस समय सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ.माया राउत ने छात्रों का मार्गदर्शन किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दीं।

इसके बाद श्री वेंकटेश्वर राइस मिल का दौरा किया। इस मिल का कुल क्षेत्रफल 2.75 हेक्टेयर है। और इस मिल को स्थापित करने की लागत लगभग 4.71 करोड़ है। मिल स्थापित करने के लिए इसे सरकार से 1 करोड़ रुपये का अनुदान मिला। इस मिल से प्रति क्विंटल माल उत्पादन करने मे करीब 200 रु. का खर्च आता है।मिल मालिक ने छात्रों को धान खरीद, उत्पादन प्रक्रिया, ड्रायर, कलर ग्रेडिंग, पैकिंग और चावल कैसे और कहां बेचा जाता है, के बारे में संपूर्ण जानकारी दी। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कृषि शिक्षा के बाद कृषि उद्योग के प्रति रूझान पैदा करना है।
इस शैक्षिक यात्रा का आयोजन मूल कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. विष्णुकांत टेकाले के मार्गदर्शन में किया गया था। प्रा. देवानंद कुसुंबे, प्रो. मोहिनी पुनसे, डॉ. अक्षय इंगोले और डॉ.गीतांशु डिंकवार ने बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया।


