Saturday, June 6, 2026
Homeकिसान शास्त्रज्ञ मंच बैठककृषि महाविद्यालय मूल द्वारा किसान शास्त्रज्ञ मंच की सत्ताइसवी बैठक का आयोजन

लोकहित समाचार मध्ये प्रसिद्ध झालेल्या बातमीतील लेखांतील आणि पत्रांतील मते संबंधित वार्ताहराची व लेखकाची असून लोकहित समाचार संपादक प्रकाशक अथवा मालक यांचा त्या मतांशी काहीही संबंध नाही. या मधील जाहिराती या जाहिरातदाराने दिलेल्या माहितीवर आधारित असतात. बातमी लेख व जाहिरातीतील मजकुराची वैधता लोकहित समाचार पाहू शकत नाही बातमी लेख व जाहिरातीतून उद्भवणाऱ्या कोणत्याही विषयाला जबाबदार संबंधित वार्ताहर लेखक किंवा जाहिरातदारच आहे.

कृषि महाविद्यालय मूल द्वारा किसान शास्त्रज्ञ मंच की सत्ताइसवी बैठक का आयोजन

मूल: ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )
कृषि महाविद्यालय, मूल द्वारा 25 मार्च 2025 को ग्राम मोरवाही में सत्ताईसवीं किसान वैज्ञानिक फोरम बैठक का आयोजन किया। कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. विष्णुकांत टेकाले के मार्गदर्शन में यह बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर मोरवाही की सरपंच सौ.अनुराधा नेवारे, अन्य किसान एवं कृषि महाविद्यालय, मुल के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।
बैठक में मुख्य रूप से ”ग्रीष्मकालीन धान एवं सब्जी फसलों का प्रबंधन” विषय पर चर्चा की गई। सर्वप्रथम महाविद्यालय की कृषि विद्या विषयतज्ञ प्रा. मोहिनी पुनसे ने ग्रीष्मकालीन धान एवं मक्का फसल प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही इस मौके पर उन्होंने कहा कि, किसानों को धान की फसल के डंठल को जलाने के बजाय उसे सड़ाना चाहिए, क्योंकि इससे मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और उन्होंने कार्बनिक पदार्थ के महत्व पर जोर दिया।किसानों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि सभी किसान ग्रीष्म ऋतु में मिट्टी का परीक्षण कर रिपोर्ट के अनुसार उर्वरक की मात्रा का प्रयोग करें।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी गायधनी ने ग्रीष्मकालीन सब्जी फसल बैंगन एवं टमाटर के प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कीट नियंत्रण के लिए जाल फसलों के फायदे और गर्मियों में फसलों को ढकने के महत्व के बारे में भी बताया।

वनस्पतिरोग विषयतज्ञ डॉ. गितांशु डिंकवार ने ग्रीष्मकालीन धान की फसल में करपा, काड़ा-कर्पा, आभासमय काजली और फोमोप्सिस ब्लाइट, पत्ती गुच्छ, मृत्यु रोग और सब्जी फसलों में सड़न के लक्षण और उपचार पर मार्गदर्शन दिया। रासायनिक फफूंदनाशकों के स्थान पर जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा के उपयोग का सुझाव दिया है। कीटविज्ञान विशेषज्ञ भूषण ठाकरे ने ग्रीष्मकालीन धान छेदक, पत्ती-छेदक, आर्मीवर्म, बॉलवर्म, फल छेदक, सब्जी फसलों में रस चूसने वाले कीट के बारे में जानकारी दी। गंध जाल, चिपचिपा जाल, ट्राईकार्ड, बिवेरिया, मेटाराइजियम जैसे जैविक कीटनाशकों के उपयोग पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
प्रा .मनीषा लवनकर ने विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के लिए विकसित किये गये विभिन्न एप के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषिसंवादिनी के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में 26 किसान एवं 05 वैज्ञानिक उपस्थित हुए थे। उक्त कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन प्रा. मनीषा लवणकर ने किया। 

Mehul Chandrakant Maniyar
90396656609039665660
संबंधित खबरे

ताज्या बातम्या

लोकप्रिय खबरे

error: Content is protected !!