संतोष सिंह रावत ने व्यक्त किए विचार
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जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के अध्यक्ष संतोष सिंह रावत ने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि बैंक के कुछ संचालक,अधिकारियों आदि की परेशानी के कारण बर्खास्त कर्मचारियों ने आत्महत्या के प्रयास का आरोप निराधार है।
जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की मुख्य शाखा के संचालक कक्ष में स्थानीय पत्रकारों से बातचीत करते हुए बैंक के अध्यक्ष संतोष सिंह रावत ने बताया, बालाजी नकटू उरकुडे की शिकायत के अनुसार मेंडकी शाखा की गहन जांच की गई।बैंक अधिकारी के माध्यम से की गई बैंक की जांच में पाया गया कि 17 लाख 67 हजार 315 रुपये 65 पैसे की हेराफेरी हुई है।बैंक के अनुरोध और संभागीय सह-पंजीयक सहकारी समिति नागपुर के आदेशानुसार जिला विशेष लेखा परीक्षक साजन साखरे ने मेंढकी शाखा के खातों की ऑडिट के बाद पकड़ी गई हेराफेरी की शिकायत ब्रह्मपुरी थाना में दर्ज कराई। प्राप्त शिकायत के आधार पर ब्रह्मपुरी थाने में धारा 420, 465, 466, 467, 468, 471, 409, 34 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। जांच उपरांत रवीन्द्र भोयर, अमित राऊत,कल्पना मसराम, ए.पी.नागपुरे और एस बी शेंडे इन कर्मचारीयो के खिलाफ सबूत मिलने पर 21 सितंबर 2020 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद अमित राऊत ने आगे की कार्रवाई से बचने के लिए अदालत से जमानत की गुहार लगाई, लेकिन अतिरिक्त जिला न्यायाधीश चंद्रपुर ने अमित राऊत की जमानत याचिका खारिज कर दी क्योंकि पेश किए गए दस्तावेज के अनुसार यह पाया गया कि अमित राऊत ने 3 लाख 89 हजार 11 रुपए का गबन किया है।बहरहाल,12 नवंबर 2020 को ब्रह्मपुरी अदालत द्वारा जमानत दिए जाने तक अमित राऊत पुलिस और न्यायिक हिरासत में थे।नियमानुसार,यदि कोई भी सरकारी या अर्धसरकारी कर्मचारी 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहता है तो उसके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जाये,ऐसा निर्देशित है। चूंकि,अमित राऊत की हिरासत अवधि डेढ़ महीने से अधिक हो गई थी, इसलिए बैंक प्रशासन ने उनके खिलाफ नियमानुसार निलंबन की कार्रवाई की, सेवानिवृत्त सहकार अधिकारी शिरभय्ये के माध्यम से विभागीय जांच के बाद, अमित राऊत को दोषी पाया गया। विभागीय जांच के अंत में दोषी कर्मचारियों के संबंध में 30 जून 2021 को आयोजित बैंक के संचालक मंडल की बैठक में सर्वसम्मति से दोषी कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई का निर्णय लिया गया।बर्खास्तगी की कार्रवाई के बाद अमित राऊत ने चंद्रपुर के श्रम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां श्रम न्यायाधीश ने पूरे मामले की जांच के बाद इस कारवाई को 24 अप्रैल 2023 को कानूनी करार दिया।इसमें बैंक प्रशासन ने कोई गलत काम नहीं किया है और न ही किसी आपसी रंजिश से कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी है,यह दर्शाया गया। जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक किसानों और आम लोगों का बैंक होने के नाते उनकी जमा राशि और विश्वास को संरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया है।
ऐसे मे कुछ समूह द्वारा अमित राउत के आत्महत्या प्रयास में बैंक के कुछ संचालक और अधिकारियों को फंसाने की कोशिश की जा रही हैं।बहरहाल,बैंक अध्यक्ष संतोष सिंह रावत ने दावा किया है कि यह आरोप अनुचित और निराधार है।


