Friday, August 21, 2026
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साहित्य के सभी अंगों को छूने वाले कविवर्य कुसुमाग्रज थे

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मराठी भाषा गौरव दिन कार्यक्रम में  प्राचार्या डाॅ. अनिता वालके ने कहा।
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शिक्षण प्रसारक मंडल द्वारा संचालित कर्मवीर महाविद्यालय के मराठी विभाग द्वारा मराठी भाषा गौरव दिन के उपलक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
प्राचार्य डॉ. अनीता वालके की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक चंद्रपुर की प्रा.डॉ. विजया गेडाम, डॉ. केवल क-हाडे, प्रा. प्रवीण उपरे, प्रा. गजानन घुमड़े, डॉ. संदीप मांडवगडे, डॉ. गणेश आगलावे और पर्यवेक्षक प्रा. दिनेश बनकर आदी उपस्थित थे।
मराठी भाषा गौरव दिवस और उसकी महानता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्राचार्य डॉ. अनिता वालके ने कहा कि 27 फरवरी को कविवर्य कुसुमाग्रज की जयंती पर “मराठी भाषा गौरव दिवस” ​​के रूप में हर जगह मनाया जाता है। यह दिन महाराष्ट्र की समग्र सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को समर्पित है।
कुसुमाग्रज ने मराठी साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। इसलिए, महाराष्ट्र सरकार ने 2013 में उनके जन्मदिन को आधिकारिक तौर पर ‘मराठी भाषा गौरव दिवस’ के रूप में घोषित किया है। उन्होंने कहा कि कुसुमाग्रज ने अपने लोकप्रिय और अद्वितीय साहित्य से मराठी साहित्य में एक नया सौंदर्य पैदा किया। महान मराठी कवि और साहित्यकार कुसुमाग्रज (वी. वी. शिरवाडकर) को 1987 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित काव्य संग्रह “विश्वगाथा” के लिए मिला था।


मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक के रूप में डाॅ. विजया गेडाम ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, कुसुमाग्रज ने साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और लघु निबंध में अमूल्य योगदान दिया। उनका साहित्य सामाजिक प्रबोधन, राष्ट्रवाद और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित है। उन्होंने अपने भाषण में मराठी भाषा और साहित्य की सराहना की। मराठी विभाग प्रमुख प्रा.भूषण वैद्य ने संचालन किया तथा समारोह की प्रस्तावना प्रा. प्रवीण उपरे ने रखी।
नई पीढ़ी में मराठी भाषा के गुणों और प्रेम को विकसित करने, प्रौद्योगिकी और आधुनिक सुविधाओं में मराठी के बढ़ते उपयोग को समझने, मराठी भाषा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने के उद्देश्य से मराठी विभाग द्वारा मराठी भाषा गौरव दिवस का आयोजन किया गया था।
इस कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन प्रा. समीर अलूरवार ने किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, और छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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Mehul Chandrakant Maniyar
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