रा. स्व. संघ के सर संघचालक डॉ मोहन जी भागवत ने कहा
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पाठशाला चलाना अब आसान काम नहीं है। शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों महंगे हो गये हैं। यहां तक कि उनमें से कुछ पैसे कमाने के लिए स्कूल भी चलाते हैं। पाठशाला को सेवा के रूप में चलाना एक व्रत है। व्रत को समान भाव और निष्ठा से करना होता है। यह खुशी और बधाई की बात है कि सन्मित्र सैनिक स्कूल ऐसा करने का प्रयास कर रही है। ऐसा रा.स्व.संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहनजी भागवत ने कहा।
बुधवार, 25 दिसंबर 2024 चंद्रपुर के सन्मित्र मिलिट्री स्कूल के 30 वे वार्षिकोत्सव समारोह के मौके पर वे बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में सन्मित्र मंडल के अध्यक्ष डाॅ.परमानंद अंदनकर, सचिव अधिवक्ता. नीलेश चोरे, स्कूल की प्राचार्या अरुंधति कवाडकर, कमांडेंट सुरेंद्रकुमार राणा मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर थे।
डॉ.मोहनजी भागवत ने आगे बताया कि, पाठशाला को सेवा के तौर पर चलाना ही एक सेवा है। यह सिर्फ शाला प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी है। जीविका के लिए शिक्षा है, यह सही परिभाषा नहीं है।
शिक्षा का असली उद्देश्य मनुष्य को विचारशील होना चाहिए। सचेतन, भावना-निर्माण शिक्षा
चाहिए ,ऐसी शिक्षा जो दूसरों को सोचने पर मजबूर करे, स्वयं सीखकर अपने परिवार का जीवन उन्नत करें, कर्ता को अच्छा माना जाता है। परिवार के सह गांव के लिए ज्यादा दौड़ने वाले के लिए सम्मान दिया जाता है। अपने देश के लिए काम कर रहे, का जन्मदिन और पुण्यतिथि मनाई जाती हैं। उस व्यक्ति को सजदा करो जो केवल संसार के लिए प्रयास करता है। स्वामी विवेकानन्द की तरह जीवन होता है ,तो सार्थक है, ऐसा कहा।



