Saturday, June 6, 2026
Homeकिसान शास्त्रज्ञ मंच बैठकमूल के कृषि महाविद्यालय द्वारा कृषक शास्त्रज्ञ मंच की 30 वी बैठक...

लोकहित समाचार मध्ये प्रसिद्ध झालेल्या बातमीतील लेखांतील आणि पत्रांतील मते संबंधित वार्ताहराची व लेखकाची असून लोकहित समाचार संपादक प्रकाशक अथवा मालक यांचा त्या मतांशी काहीही संबंध नाही. या मधील जाहिराती या जाहिरातदाराने दिलेल्या माहितीवर आधारित असतात. बातमी लेख व जाहिरातीतील मजकुराची वैधता लोकहित समाचार पाहू शकत नाही बातमी लेख व जाहिरातीतून उद्भवणाऱ्या कोणत्याही विषयाला जबाबदार संबंधित वार्ताहर लेखक किंवा जाहिरातदारच आहे.

मूल के कृषि महाविद्यालय द्वारा कृषक शास्त्रज्ञ मंच की 30 वी बैठक संपन्न

 

मूल : ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )
डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, आकोला सलंग्नित यहां के कृषि महाविद्यालय द्वारा 30वीं किसान शास्त्रज्ञ मंच की बैठक महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे के मार्गदर्शन में ग्राम चितेगांव में 24 जून 2025 को संपन्न हुई. इस अवसर पर ग्राम चितेगांव के उप सरपंच श्री हरिदास गोहने, और अन्य किसान तथा कृषि महाविद्यालय, मूल के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। इस बैठक में चर्चा का मुख्य विषय “धान, तुअर और सब्जी फसलों की खेती के तकनीक” सम्बन्ध में रहा। इसमें सबसे पहले महाविद्यालय के उद्यानिकी विषय विशेषज्ञ डॉ. आर. पी. गजभिये ने किसानों की समस्याओं के बारे में जाना और खरीफ मौसम में शुरू होने वाली धान, तुअर और सब्जी फसलों पर कम खर्च करके अधिकतम आय कैसे प्राप्त करें, इस पर किसानों का मार्गदर्शन किया। आगे कहा कि किसानों को एकीकृत कीट और उर्वरक प्रबंधन करना आवश्यक है। उन्होंने सब्जी फसलों में मिर्च और बैंगन की खेती तकनीक के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।


कृषि विद्या विषय विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापिका मोहिनी पुनसे ने धान की फसलों में 3 प्रतिशत नमक के घोल का उपयोग करने के लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्वस्थ नर्सरी तैयार करने और प्रबंधन करने के तरीके पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया । किसानों को बताया कि, नाइट्रोजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कल्ले निकलते समय गिरिपुष्प और हरी खाद डालना आवश्यक है। उन्होंने उर्वरक और खरपतवार प्रबंधन के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। वनस्पति रोगशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. प्रवीणा बरडे ने धान की फसलों जैसे करपा, मनमोड़ी और कड़ा-करपा की प्रारंभिक अवस्था में किए जाने वाले उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सब्जी की फसलों में तना और जड़ सड़न रोगों को नियंत्रित करने के लिए परजीवी जैविक कवकनाशी ट्राइकोडर्मा के महत्व के बारे में मार्गदर्शन किया। उन्होंने यह भी कहा कि, किसानों को ट्राइकोडर्मा, जैविक उर्वरकों और कवकनाशी का उपयोग करके खेती की लागत कम करनी चाहिए और आय और उत्पादन बढ़ाना चाहिए।
महाविद्यालय की कृषि विस्तार शिक्षा विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापिका मनीषा लवणकर ने विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के लिए प्रकाशित तकनीकी रूप से उन्नत कृषि पत्रिका के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस कार्यक्रम में कुल 40 किसान उपस्थित थे। महिलाओं की ओर से भी उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। कृषि महाविद्यालय की कृषि विस्तार शिक्षा विषयतज्ञ सहायक प्रा. मनीषा लवणकर ने कार्यक्रम का संचालन और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Mehul Chandrakant Maniyar
90396656609039665660
संबंधित खबरे

ताज्या बातम्या

लोकप्रिय खबरे

error: Content is protected !!