Friday, August 21, 2026
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पैर खून से लथपथ हो जाए, तो भी चलेगा, मात्र सुधीर मुनगंटीवार को मंत्रीपद मिलना ही चाहिए

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चंद्रपुर बीजेपी में कार्यकर्ताओं में नाराजगी; नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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राज्य के और बीजेपी के दिग्गज नेता, सुधीर मुनगंटीवार इस बार कैबिनेट में नहीं। बीजेपी सत्ता में आई और मुनगंटीवार आज तक कैबिनेट में नहीं हैं, ऐसा कभी भी हुआ नहीं था। लेकिन इस बार उल्टा हुआ। मुनगंटीवार को मंत्री पद न मिलने पर वे खुद नाराज नहीं, लेकिन उनके समर्थक नाराज हैं। कार्यकर्ताओं की आँखों में पानी है।चंद्रपुर के काफी प्रियजन, भाई की बहने  ,जिसके लिए मुनगंटीवार दौड़े थे वे मरीज और उनके परिजन, बेसहारा, माताओं-बहनों, विद्यार्थियों, किसानों ने नाराजगी जताई है।. मुनगंटीवार ने भले ही, ‘चुप्पी साधी है, लेकिन सभी ने तय किया कि, वे चुप नहीं बैठेंगे। इसीलिए चंद्रपुर से मुनगंटीवार के प्रशंसक पैदल ही निकल पड़े। आगे नागपुर और फिर दिल्ली तक मार्च किया जाएगा। उन सभी ने यह रुख अपनाया है कि, भले ही चंद्रपुर से दिल्ली पहुंचने तक हमारे पैर खून से लथपथ हों, लेकिन सुधीर भाऊ को मंत्री पद मिलना ही चाहिए। एक-एक कर मुनगंटीवार के प्रशंसक इस अनोखे पदयात्रा सत्याग्रह में हिस्सा ले रहे हैं। वे केवल एक ही उत्तर चाहते हैं, की सही समय पर सुधीर मुनगंटीवार को कैबिनेट से क्यों हटाया गया? शुरुआत में ये सभी कार्यकर्ता पैदल चलकर नागपुर पहुंचने वाले हैं. वह मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे दिल्ली की ओर मार्च करेंगे।

मांग सही है

इन सभी कार्यकर्ताओं के सामने यह सवाल है कि, राष्ट्रगान ‘दिल्ली चे तख्त रखतो महाराष्ट्र माजा’ देने वाले सुधीर मुनगंटीवार को दिल्ली के मंत्री पद से कैसे वंचित किया जा सकता है। मंगलवार दोपहर (17 दिसंबर) को चंद्रपुर से नागपुर तक कार्यकर्ताओं की पदयात्रा शुरू हो गई है। ये कार्यकर्ता नागपुर में संतुष्ट हुए तो नहीं तो दिल्ली की ओर अपनी यात्रा जारी रखने का दृढ़ निश्चय कर लिया है।
चंद्रपुर से निकले ये कार्यकर्ता इस ठंड में बिना भूखे-प्यासे चलते रहेंगे। इस पदयात्रा में पडोली, भद्रावती, वरोरा, खंबाला क्षेत्रों से कार्यकर्ता शामिल होंगे। मुनगंटीवार के समर्थकों का मानना ​​है कि, इस सत्याग्रह पदयात्रा में नागपुर पहुंचते-पहुंचते कार्यकर्ताओं की संख्या काफी हो जाएगी।

कारवां बढता रहे..

मुनगंटीवार का राजनीतिक करियर ‘मैं अकेला ही चला था, जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया’ वाला रहा है। अपने 30 साल के विधायक कार्यकाल में उन्होंने लोगों को जोड़ा। तभी तो उनके लिए भी फैन्स का ‘कारवां’ तैयार हो रहा है। फिलहाल चंद्रपुर से फारुख शेख, हरीश व्यवहारे, सूरज पारखी, अमित तामटकर, अरविंद बोरकर, देवानंद थोरात, भोजराज शिंदे, मनोज ठेंगणे, दीपक सिंग़ आदि कार्यकर्ता रवाना हो गए हैं।लेकिन अब ये संख्या बढ़ने वाली है. रास्ते में हर गांव से सुधीर मुनगंटीवार के कार्यकर्ता सत्याग्रह पदयात्रा में शामिल होंगे।
मैं नाराज नहीं हूं, और नाराज होने वालों में से नहीं हूं। लेकिन तय हुआ था कि, मुझे कैबिनेट में शामिल किया जायेगा, ऐसा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा। शपथ ग्रहण के दिन भी मुझे फोन नहीं आया।मुझे इसका कारण नहीं मालूम था। मैं कारण जानना चाहता हूं। मैं बीजेपी का कार्यकर्ता हूं, पार्टी के लिए ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाऊंगा।’ जिम्मेदारी पूरी ताकत से निभाना मेरा कर्तव्य है।’ यह कर्तव्य मैं आज तक निभा रहा हूं। विधायक मुनगंटीवार ने मीडिया से कहा है कि, वह ऐसा करना जारी रखेंगे। इसके चलते कभी न हारने वाले मुनगंटीवार के लिए कार्यकर्ता भी तैयार हैं।

सातवीं बार विधायक

सुधीर मुनगंटीवार लगातार सातवीं बार चंद्रपुर जिले से विधायक चुने गए हैं। इस जिले में अब तक जो भी कार्य देखने को मिले हैं, वे उन्हीं की बदौलत हुए हैं। अगर सुधीर मुनगंटीवार नहीं होते तो चंद्रपुर जिला 20 साल पीछे होता। इसलिए हम इस बात से काफी नाराज हैं कि, उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। यहां से हम पैदल ही नागपुर जाएंगे। हम वहां मुख्यमंत्री से मिलेंगे। अगर हमारा काम यहीं हो गया तो ठीक है, अन्यथा वहां से पैदल ही दिल्ली की ओर बढ़ेंगे। दिल्ली में हम अपनी बात रखेंगे।जब तक सुधीर मुनगंटीवार को मंत्री पद नहीं मिल जाता, हमारे कदम नहीं रुकेंगे। चंद्रपुर से पदयात्रा में शामिल कार्यकर्ताओं ने अपनी भावना व्यक्त की है कि भले ही उनके पैरों से खून बह जाए, लेकिन ये कदम नहीं रुकेंगे।

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Mehul Chandrakant Maniyar
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