Saturday, August 22, 2026
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मूल के कृषि महाविद्यालय के कृषिदूतों द्वारा बिजपात्र की तैयारी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

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गोगाव में RAWE के अंतर्गत बीजपात्र की तैयारी पर कृषिदूतों का व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

मूल ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )

         डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला से संबद्ध कृषि महाविद्यालय, मुल-मरोड़ा के बी.एससी. (कृषि) अंतिम वर्ष के छात्रों द्वारा ग्रामीण कृषि कार्यानुभव (RAWE) कार्यक्रम के अंतर्गत गोगाव ग्राम में “बीजपात्र की तैयारी” विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों को बीज बुवाई से पूर्व भूमि की वैज्ञानिक एवं शास्त्रीय तैयारी के प्रति जागरूक करना और उत्पादन की नींव मजबूत करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

कृषिदूतों ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि बीजपात्र तैयारी फसल उत्पादन की सबसे महत्वपूर्ण और प्रारंभिक कड़ी है। एक अच्छी तरह से तैयार की गई बीजपात्र भूमि भुरभुरी, समतल, उपजाऊ, रोगमुक्त और नमी से भरपूर होती है, जिससे बीजों को अंकुरण के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है। इससे अंकुरण दर बढ़ती है, पौधों की प्रारंभिक वृद्धि मजबूत होती है और अंततः कुल उत्पादन में सुधार होता है। बीजपात्र की तैयारी के अंतर्गत गहरी जुताई, दो-तीन बार हल्की जुताई (कुलावनी), पाटा चलाना, सड़ी-गली जैविक खाद का समावेश, मिट्टी परीक्षण कर उपयुक्त उर्वरकों का प्रयोग, pH संतुलन बनाए रखना, नमी प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और जल निकासी की उचित व्यवस्था जैसे चरण अत्यंत आवश्यक माने गए।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषिदूतों ने खेत पर जाकर बीजपात्र की तैयारी की प्रत्यक्ष तकनीकें किसानों को दिखाईं और उनके साथ संवाद कर विभिन्न शंकाओं का समाधान भी किया। उन्होंने यह भी समझाया कि यदि बीज समुचित गहराई और सही दूरी पर बोए जाएं तो पौधों की वृद्धि एकसमान होती है और रोगों की संभावना भी कम हो जाती है।

इस कार्यक्रम में कृषिदूतों के रूप में ओमप्रकाश वाकडे, राहुल चिखलोंढे, आयुष अंभोरे, विशाल तोंडफोडे, त्रिकोण रंदये, कृषि सहायक तथा गोगाव के अन्य स्थानीय किसान उपस्थित थे। उपस्थित किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम गांव स्तर पर निरंतर आयोजित किए जाएं।

इस पहल की सफलता महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. विलास अतकरे के सक्रिय मार्गदर्शन तथा डॉ. युवराज खोबरागड़े (प्रभारी अधिकारी, कृषि अनुसंधान केंद्र, सोनापुर), प्रो. मोहिनी पुनसे (विषय विशेषज्ञ, कृषि शास्त्र), कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रामकांत गजभिये और डॉ. अश्विनी गायधनी के सशक्त मार्गदर्शन के कारण संभव हो पाई।

       इनके नेतृत्व में छात्रों को न केवल व्यावसायिक ज्ञान की गहराई तक पहुंचने का अवसर मिला, बल्कि उन्हें किसानों के साथ सीधा संवाद कर कृषि समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।

RAWE कार्यक्रम के माध्यम से छात्र प्रयोगशाला से निकलकर खेतों में उतरते हैं और अपनी अकादमिक जानकारी को सामाजिक उपयोगिता में बदलते हैं। इस तरह के कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए शिक्षाप्रद हैं, बल्कि ग्रामीण समुदायों में वैज्ञानिक खेती की दिशा में भी एक सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रहे हैं।

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Mehul Chandrakant Maniyar
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