Saturday, August 22, 2026
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मूल के कृषि महाविद्यालय में IBPS तथा कृषि संबंधी परीक्षा सफलता सूत्र पर मार्गदर्शन कार्यक्रम

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मुल ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )

       बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि पाठ्यक्रम की डिग्री प्राप्त करने के बाद, छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 में कृषि महाविद्यालय में एक प्लेसमेंट सेल और प्रतियोगी परीक्षा मंच की स्थापना की गई थी। यह प्रतियोगी परीक्षा मंच छात्रों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की सफलतापूर्वक तैयारी करने के लिए हर महीने विशेष व्याख्यान आयोजित करता है। इस व्याख्यान श्रृंखला में तीसरा व्याख्यान 29 सितंबर, 2025 को “आईबीपीएस और कृषि-संबंधी परीक्षाओं की तैयारी” विषय पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे, ने की।

मुख्य वक्ता विवेक दिवाठे, कनिष्ठ वाणिज्यिक कार्यकारी, भारतीय कपास निगम और सागर कोराटे, सहायक ग्रेड-III (तकनीकी), भारतीय खाद्य निगम, थे, जो प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं। कार्यक्रम में उद्यानिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. आर. पी. गजभिये और महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत वनस्पति रोग शास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. गीतांशु डिंकवार ने कि,उन्होंने उपस्थित गणमान्यों का स्वागत किया और कार्यक्रम के माहौल को उत्साहपूर्ण और प्रेरक बनाया। कार्यक्रम की प्रस्तावना नागेश नवघरे ने रखते हुए उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्यों और आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम मार्गदर्शक विवेक दिवाठे ने आईबीपीएस (बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान) परीक्षाओं की प्रकृति, आवश्यक पाठ्यक्रम, समय-सारिणी और स्मार्ट अध्ययन विधियों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। छात्रों को योजनाबद्ध अध्ययन के महत्व के बारे में समझाते हुए उन्होंने दैनिक अध्ययन में निरंतरता, अभ्यास परीक्षणों के महत्व और समय प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को मंत्र दिया कि 8 + 8 + 8 का अर्थ है 8 घंटे पढ़ाई, 8 घंटे सोना और 8 घंटे बाकी काम। उन्होंने अपने अनुभव से कहा कि ,किसी भी परीक्षा की तैयारी करते समय अभ्यास परीक्षण देना बहुत फायदेमंद होता है और धैर्य और त्याग दो चीजें हैं जो आपको सफलता की सीढ़ी तक ले जाती हैं। सागर कोराटे ने कृषि अधिकारी, कृषि सेवा, नाबार्ड, एफसीआई और अन्य कृषि से संबंधित क्षेत्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को विभिन्न सरकारी नौकरियों में कृषि शाखा में अवसरों, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और तैयारी करते समय आवश्यक कौशल के बारे में मार्गदर्शन किया।
। उन्होंने छात्रों से समूह चर्चा करने का आग्रह किया क्योंकि इससे कम समय में अधिकतम अध्ययन करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि अगर आप खुद के साथ ईमानदारी से अध्ययन करेंगे, तो आपको सफलता ज़रूर मिलेगी।

उद्यानिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. आर. पी. गजभिये ने विद्यार्थियों को सफलता का मूल मंत्र देते हुए कहा कि “पाँचों इंद्रियों पर नियंत्रण पाएँ, सफलता आपकी होगी।” प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता में हमेशा बाधक बनने वाली बातें। साथ ही, “प्रबल इच्छाशक्ति ऐसे विचारों का निर्माण करती है जो सफलता का मार्ग खोजते हैं और अंततः कर्म की ओर ले जाते हैं।” उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा स्वयं से होनी चाहिए और आलस्य, बुरे विचार, बुरे मित्र, बुरी वाणी, बुरे कर्म और अज्ञानता को अपने भीतर से निकालने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. वी. जी. अतकरे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में विद्यार्थियों को बताया कि, “सफलता प्रयास, विचार और कर्म का एक सतत चक्र है, जो तब तक चलता रहता है जब तक हम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच जाते। सकारात्मक बातचीत, अच्छी सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण, अनुशासन और प्रतिबद्धता ही सफलता का वास्तविक मार्ग है।” उन्होंने विद्यार्थियों को सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। नागेश नवघरे ने उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों, विद्यार्थियों और कार्यक्रम को सफल बनाने में कड़ी मेहनत करने वाली पूरी टीम को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम का समापन किया। कृषि महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों के साथ-साथ विद्यार्थियों ने भी इस व्याख्यान में बड़ी संख्या में भाग लिया। मार्गदर्शक वक्ताओं ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए और उनकी शंकाओं का समाधान किया।

यह विशेष व्याख्यानमाला विद्यार्थियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। कृषि क्षेत्र के विद्यार्थियों को इस पहल से उचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ कि वे केवल शिक्षा तक ही सीमित न रहकर, विभिन्न सरकारी और बैंकिंग क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के लिए कैसे तैयारी करें। कृषि महाविद्यालय, मूल ने भविष्य में भी ऐसे उपयोगी और विद्यार्थी-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया है।

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Mehul Chandrakant Maniyar
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