मूल: ( प्रा.चंद्रकांत मनियार )
यहां के कृषि महाविद्यालय, द्वारा 22 जनवरी, 2025 को ग्राम चितेगांव में 25वीं किसान वैज्ञानिक फोरम बैठक का आयोजन किया। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डाॅ. विष्णुकांत टेकाडे, गांव के उपसरपंच श्री हरिदास गोहणे, प्रगतिशील किसान अरविंद जोशी, अन्य किसान एवं कृषि महाविद्यालय, मूल के विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। सबसे पहले कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ.टेकाडे ने चितेगांव के उपसरपंच को वर्मी कम्पोस्ट एवं केंचुआ पानी की बोतलें भेंट कीं। इस बैठक में ”रबी फसल में ,,एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन” विषय पर चर्चा की गई। डॉ.विष्णुकांत टेकाडे ने कहा कि, किसानों को एकजुट होकर समूह खेती की ओर रुख करना चाहिए।अलग-अलग फसलों के अनुसार समूह बनाना चाहिए ताकि किसानों को उचित बाजार मूल्य मिल सके।

उन्होंने कहा कि, केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय दलहन, अनाज, फूलों की खेती और विभिन्न सब्जियों की खेती की जानी चाहिए।
उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि संवादिनी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि, किसानों को जानकारी के लिए अपने ग्राम पंचायत कार्यालय में विश्वविद्यालय की तकनीक वाली कृषि संवादिनी रखनी चाहिए। उद्यान विद्या विशेषज्ञ डॉ.अश्विनी गायधनी ने प्याज की खेती की तकनीक का मार्गदर्शन किया, और कृषि विश्वविद्यालय, अकोला द्वारा विकसित किस्म “अकोला सफेद” के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि विद्या विशेषज्ञ प्रा.देवानंद कुसुम्बे ने ग्रीष्मकालीन धान और चने की फसल की खेती की तकनीक, कीट और बीमारियों के प्रबंधन के बारे में मार्गदर्शन दिया ,और जैविक खेती में वर्मीकम्पोस्ट और वर्मीवाटर बनाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। वनस्पति रोग विषयतज्ञ डॉ.प्रवीणा बरडे ने ग्रीष्मकालीन धान और सब्जी फसलों के वायरल रोगों और कीटों पर मार्गदर्शन दिया और ग्रीष्मकालीन धान में बोरर, लीफरोलर, आर्मीवर्म और कैटरपिलर आदि के एकीकृत प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।साथ ही जैव उर्वरक, ट्राइकोडर्मा और बायोडिग्रेडेंट्स पर विस्तृत जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में 51 किसान और 5 वैज्ञानिक शामिल हुए थे। उक्त कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन प्रा. मनीषा लवनकर ने किया।


