Saturday, June 6, 2026
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मूल के कृषि महाविद्यालय में गणेश उत्सव मनाया जाएगा

मूल ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )

यहां के कृषि महाविद्यालय में सहयोगी अधिष्ठाता डॉ विलास अतकरे के मार्गदर्शन में छात्रों की मांग को देखते हुए पर्यावरण पूरक 5 दिवसीय गणेश उत्सव  ( मनोमय 2025 ) मनाया जा रहा है।  गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर महाविद्यालय परिसर में गणेशजी की मूर्ति की विधिवत् स्थापना की गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ छात्र छात्राएं शामिल हुई थीं। छात्रा द्वारा मनमोहक रंगोली निकाली गई थी।

 


पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस दिन महादेव शंकर आणि माता पार्वती के पुत्र गणेश का जन्म हुआ, वही दीन, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है। 
गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से शुरू हुआ है। दस दिनों तक चलने वाला यह पर्व पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सबसे पहले गणपति पूजन से की जाती है।

 

गणेश चतुर्थी का त्योहार केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि ये एक ऐसा उत्सव है जो आपसी भाईचारे और एकता का भी संदेश देता है।
गणेश चतुर्थी ने एक भव्य सार्वजनिक उत्सव का रूप तब ग्रहण किया जब मराठा शासक शिवाजी (लगभग 1630-80) ने मुगलों से लड़ रहे अपने नागरिकों में राष्ट्रवादी भावना को प्रोत्साहित करने के लिए इसका प्रयोग किया । 1893 में, जब अंग्रेजों ने राजनीतिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया, तो भारतीय स्वतंत्रता नेता बाल गंगाधर तिलक द्वारा महाराष्ट्र में एक बड़े सार्वजनिक आयोजन के रूप में इस उत्सव को पुनर्जीवित किया गया। आज यह उत्सव महाराष्ट्र, महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे शहरों के साथ-साथ भारत के कई अन्य हिस्सों में विशेष रूप से लोकप्रिय है ।

Mehul Chandrakant Maniyar
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