Thursday, October 22, 2026
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चुनाव के पुर्व फसल ऋण माफी की घोषणा के बावजूद किसानों का ऋण माफ नहीं हुआ

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राज्य सरकार को घोषणा पत्र में किसानों से किया गया वादा पूरा करना चाहिए….. सभापति राकेश रत्नावार

मूल –
चंद्रपुर जिले की महाराष्ट्र में चावल उत्पादक जिले के रूप में पहचान बनी है। जिले के मूल, सावली ,सिंदेवाही ,पोंभुरना तहसील में एक बड़ा धान बाजार है। लेकिन इस साल किसानों के धान की भी कोई गारंटीशुदा कीमत नहीं मिली। पिछले साल 3000 रु. से प्राप्त हुई थी। लेकिन इस वर्ष धान के लिए मात्र 2700 रुपये दिये गये। व्यापारियों ने धान की खरीद बंद कर दी गई है, क्योंकि अभी भी वही कीमत दी जा रही है। इसलिए किसानों का माल मंडी समिति में पड़ा हुआ है। इससे किसान आर्थिक संकट में है। पिछले 23-24 वर्षों में किसानों को अनेक सूखे संकटों का सामना करना पड़ा। कई दिनों तक अचानक मूसलाधार बारिश हुई, जिसके कारण हर जगह अच्छी बारिश का कहर जारी रहा। मुल-सावली ,पोंभुरना तहसील में धान की फसल की कटाई हो चुकी थी, इसलिए धान के खेत में ही धान भीग गया। इसके साथ ही बादल छाए रहने से अरहर की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। इस संबंध में सरकार की ओर से कलेक्टर, कृषि विभाग और राजस्व विभाग को नुकसान का सर्वे करने के आदेश दिए गए थे।उस समय सरकार की ओर से एक सर्वेक्षण किया गया था, जिसकी रिपोर्ट सौंपी गई थी। लेकिन जैसे ही फसल खराब हुई, इस हिसाब से मौके पर जाकर सर्वे कराया जाना चाहिए था। लेकिन सरकार की ओर से ऐसा नहीं किया गया। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। किसानों ने सरकार से यह भी पूछा कि सर्वे और निरीक्षण करने वाले सरकारी प्रतिनिधि नुकसान की पहचान कैसे कर सकते हैं। इसके बावजूद किसानों को एहसास हुआ कि, व्यवस्थित तरीके से निरीक्षण या सर्वेक्षण करने का मतलब है कि किसानों को मुआवजा देने में किसानों के साथ भेदभाव किया गया है। कृषि उपज बाजार समिति के सभापति राकेश रत्नावार ने मांग की है कि, जिन किसानों को वास्तव में नुकसान हुआ है, उन्हें सरकार तुरंत कर्ज माफी और फसल बीमा राशि दे। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने अपने पार्टी के घोषणा पत्र में वादा किया था कि, अगर हम सत्ता में आए तो किसानों का पूरा कर्ज माफ करेंगे। लेकिन सरकार बनने के तीन महीने बाद भी क्या सरकार कर्जमाफी शब्द भूल गयी है? ऐसा किसान सवाल पूछ रहे हैं। सरकार किसानों के किसी भी मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं है।
किसानों ने पिछले वर्ष लिए गए फसली ऋण की रकम वसूलना शुरू कर दिया है। लेकिन किसान असमंजस में हैं कि फसल ऋण की रकम कहां से चुकाएं।
क्योंकि राज्य सरकार ने किसानों को आश्वासन देने के बावजूद अभी तक फसल ऋण माफ नहीं किया है।
वहीं किसानों को फसल बीमा की राशि भी नहीं दी गयी है। किसानों को अभी तक आकस्मिक क्षति का मुआवजा नहीं मिला है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब वे इस तरह के वित्तीय संकट में हैं, तो वे फसल ऋण कहां से चुकाएंगे। मूल गारंटी मूल्य बोनस नहीं दिया गया है। इस वर्ष धान की फसल किसानों के हाथ में आते ही सरकार ने मूल गारंटी मूल्य बोनस दर्ज करने की घोषणा की है। इसके अनुसार, तहसील के किसानों ने दिन-रात कतार में लगकर कृषि उपज बाजार समिति में अपना पंजीकरण कराया। पंजीकरण की समय सीमा दो या तीन बार बढ़ाई थी, जिससे 10,000 से अधिक किसानों ने मूल कृषि उत्पादन बाजार समिति के तहत पंजीकरण कराया है। यह पैसा भी सरकार 31 जनवरी के अंदर किसानों के खाते में जमा कर देगी, ऐसा आश्वासन दिया था।
लेकिन किसानों को मूल गारंटी मूल्य का पैसा भी नहीं दिया गया है। एक तरफ जहां धान की कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों ने धान बेचना बंद कर दिया है।इसलिए आज की स्थिति में किसान बड़े आर्थिक संकट में है। फिलहाल किसानों के हाथ में पैसे नहीं हैं और फसल ऋण की रकम चुकाने का समय आ गया है। मूल कृषि उपज बाजार समिति के सभापति और चंद्रपुर जिला कांग्रेस के महासचिव राकेश रत्नावार ने मांग की है कि, सरकार को घोषणा पत्र में दिए गए वादे को पूरा करना चाहिए और आर्थिक संकट में फंसे किसानों को कर्ज माफी देनी चाहिए।

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Mehul Chandrakant Maniyar
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