Friday, October 23, 2026
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धान नर्सरी की तैयारी करने हेतु कृषि महाविद्यालय के छात्रों ने दी जानकारी

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     मूल : ( प्रा. चंद्रकांत मनियार )

डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला से संबद्ध कृषि महाविद्यालय, मूल ने ग्रामीण जागरूकता कार्य अनुभव कार्यक्रम (आरएडब्ल्यूई) के अंतर्गत गढ़चिरौली जिले के पुलखल गांव में एक क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किया और किसानों को चावल की नर्सरी बेड तैयार करने के तरीके के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
छात्रों ने किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी। इसमें उचित जुताई, क्यारी की माप (लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई), जल निकासी, खरपतवार नियंत्रण, बीज उपचार, जैविक खाद का उपयोग, जल प्रबंधन और प्राथमिक सुरक्षा शामिल थी।
इस वक्त छात्रों ने चावल नर्सरी के लाभ बताए । जिसमे बताया गया कि, अच्छे अंकुरण वाले स्वस्थ एवं एकसमान पौधे प्राप्त होते हैं।
रोपण के बाद, पौधे शीघ्र ही अंकुरित हो जाते हैं तथा फसल एक समान उगती है।
कीटों और बीमारियों का प्रकोप कम हो जाता है।
इससे उर्वरक, पानी, श्रम और समय की बचत होती है।
खेती में अधिक एवं बेहतर गुणवत्ता वाली उपज पैदा करता है।
इस अवसर पर किसानों द्वारा अलग अलग प्रश्न पूछे गए।
नर्सरी के लिए कौन सी जगह चुनें?
नर्सरी तैयार करते समय उर्वरक की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
बीजों को क्या प्रक्रिया दी जाए?
भाप कितनी बड़ी होनी चाहिए?
एक एकड़ में नर्सरी उगाने के लिए कितने क्षेत्र की आवश्यकता होती है?
बुवाई के कितने दिन बाद रोपण किया जाना चाहिए?
छात्रों ने इन सभी सवालों के विस्तृत जवाब दिए। किसानों ने भी इस पहल पर उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी।
इस कार्यक्रम में कृषिदूत के रूप में श्याम धानोरे, भूषण हावरे, दशरथ वानखेड़े, कुन्दन किनाके, सौरभ पातोंड, समय उपरीकर ने भाग लिया। इस वक्त आपुल ठाकरे, विनायक रोडे, नानाजी ठाकरे और अन्य किसान भी मौजूद थे।
इस उपक्रम के लिए सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. विलास अतकरे ने मार्गदर्शन दिया। डॉ. युवराज खोबरागड़े (प्रभारी अधिकारी, कृषि अनुसंधान केंद्र, सोनापुर), प्रो. मोहिनी पुनसे (विषय विशेषज्ञ, कृषि शास्त्र), कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रामकांत गजभिये और डॉ. अश्विनी गायधनी ने छात्रों का मार्गदर्शन किया।

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Mehul Chandrakant Maniyar
90396656609039665660
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